सुन्दर एवं सुडौल स्तन बनाने के प्रभावी उपाय

सुडौल स्तन श्रेष्ठतम नारी के प्रतीक माने जाते हैं, नारी की सुन्दरता की यदि हम बात करें तो उनके इस सौन्दर्य में उनके स्तनों के आकार का विशेष महत्व होता है । नारी के नैन नक्श कितने भी सुंदर क्यों न हो लेकिन यदि उसके वक्षस्थल भरे हुए सुदृढ़ एवं उन्नत नहीं हैं तो उनके अभाव में नारी की सुन्दरता में कमी आ सकती है | उन्नत एवं सुडौल स्तन अर्थात वक्षस्थल वर्तमान में हर नारी की चाहत होती है ताकि उसकी सुन्दरता में निखार आ सके | हालांकि यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की सुडौल एवं उन्नत स्तन स्त्री के आभूषण होते हैं । क्योंकि उन्नत एवं सुडौल स्तनों वाली स्त्रियाँ पुरुषों में खास तौर पर लोकप्रिय होती हैं क्योंकि सम्भोग या रति क्रिया के दौरान सुडौल एवं उन्नत वक्षस्थ्लों का बेहद महत्व होता है और यही कारण होता है की पुरुषों को अपनी ओर आकर्षित करने में भी स्तनों का एक विशेष योगदान होता है | उन्नत एवं सुडौल स्तन से हमारा अभिप्राय गोल, कठोर एवं पूर्ण विकसित स्तनों से है | जिन पर प्रत्येक नारी नाज कर सकती है हालांकि प्राय यह अवश्य देखा गया है की उचित देखभाल न मिलने के कारण बहुत बार
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Hypoglycemia के कारण लक्षण एवं उपचार

Hypoglycemia को हिंदी में अल्प शर्करा रक्तता भी कह सकते हैं और हाइपोग्लाइसीमिया भी, जहाँ तक इस रोग की उत्पति का सवाल है इस रोग की उत्पति शरीर के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा के जरूरत से ज्यादा कम हो जाने के कारण होती है | और शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा जरुरत से ज्यादा कम होने के अनेकों कारण हो सकते हैं जिससे Hypoglycemia नामक रोग की उत्पति हो जाती है | कहने का आशय यह है की रक्त में शर्करा की अल्पता हो जाने को मेडिकल टर्म में Hypoglycemia नामक नाम से जाना जाता है | इसके अलावा यह भी कहा जा सकता है की रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा कम हो जाने वाली स्थिति को ही इस नाम से जाना जाता है | हाइपोग्लाइसीमिया नामक यह रोग अचानक से शुरू हो सकता है और ग्लूकोज युक्त पानी एवं चिकित्सक को दिखाकर इसे दूर भी किया जा सकता है लेकिन समय पर इस रोग का ईलाज न करने पर व्यक्ति के सामान्य लक्षण गंभीर लक्षणों जैसे भ्रम, बेहोशी इत्यादि में परिवर्तित होकर जानलेवा भी साबित हो सकते हैं | Hypoglycemia होने के कारण (Cause of Hypoglycemia in Hindi): जैसा की हम बता चुके हैं की Hypoglycemia नामक
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Food Poisoning कारण लक्षण एवं ईलाज

Food poisoning यानिकी भोजन विषाक्तता अनेक कारणों से हो सकती है लेकिन इनमे से दो जो मुख्य कारण इसके होने के बताये गए हैं उनमे एक बेमेल भोजन यानिकी Unbalanced diet एवं दूसरा बाहर का खाना या किसी गन्दी जगह पर बना हुआ खाना खाना इसका कारण हो सकता है | कहने का आशय यह है की खाद्य पदार्थ तो होते ही शरीर को शक्ति एवं उर्जा देने के लिए, लेकिन यदि विभिन्न तासीर वाली खाद्य पदार्थों को एक साथ ग्रहण कर लिया जाय तो Food Poisoning अर्थात भोजन विषाक्तता हो सकती है | उदाहरणार्थ: जैसे शराब के साथ दूध का सेवन करने से, घी के साथ शहद का सेवन करने से, चावल एवं सिरके का एक साथ उपयोग करने से और गंदगी युक्त खाना खाने से भी Food Poisoning हो सकती है | इस भोजन विषाक्तता के कारण रोगी में  पेट में दर्द, दस्त एवं उल्टियाँ आने जैसे लक्षण प्रदर्शित हो सकते हैं | भोजन विषाक्तता के कारण (Cause of Food Poisoning in Hindi) भोजन विषाक्तता के होने के कारणों को मुख्य तौर पर दो भागों में विभाजित किया जा सकता है | सामान्य कारण एवं बैक्टीरिया एवं वायरस जनित कारण हालांकि सामान्य कारण भी बाद में बैक्टीरिया
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मधुमक्खी एवं ततैया का डंक मारने के लक्षण एवं ईलाज

मधुमक्खी एवं ततैया का डंक मारना अर्थात काटना कभी कभी बेहद खतरनाक रूप धारण कर सकता है |  मधुमक्खी के काटने को वर्तमान में हलके में लिया जाता है लेकिन यदि समय पर इसका ईलाज न किया गया तो कुछ स्थितियों में यह विकराल रूप धारण कर सकता है | हालांकि ततैया के काटने अर्थात Wasp Sting को मधुमक्खी के काटने से थोडा बहुत गंभीरता से अवश्य लिया जाता है | हालांकि मधुमक्खी एवं ततैया दोनों के काटने पर जलन, सूजन के साथ तेज बुखार भी आ सकता है, इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से मधुमक्खी एवं ततैया के डंक मारने के लक्षणों एवं ईलाज के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | मधुमक्खी एवं ततैया के डंक मारने के लक्षण (Symptoms of Bees & wasp sting). मधुमक्खी एवं ततैया के डंक मारने के कुछ प्रमुख लक्षण निम्नवत हैं | मधुमक्खी एवं ततैया के डंक मारने के लक्षण स्थानीय होते हैं | डंक मारे जाने वाली जगह पर जलन एवं सूजन हो सकती है | मधुमक्खी एवं ततैया के डंक मारने पर डंक वाले स्थान पर दर्द, लाली एवं चकते से हो सकते हैं | अधिक डंक लग जाने पर कभी कभी रक्तचाप में भी कमी
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बिच्छू के काटने के लक्षण एवं ईलाज

बिच्छू के काटने पर असहनीय दर्द तो होता ही है साथ में इसका विष अर्थात जहर श्वसन व केन्द्रिय तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है । बिच्छू एक ऐसा विषैला कीट है जो ग्रामीण एवं जंगल से लगे इलाकों में तो पाया ही जाता है साथ में कच्ची जगहों में शहरों में भी यह कीट देखने को मिलता है | जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की यह एक विषैला कीट है इसलिए इसके काटने पर शरीर में विष फैलने का भी खतरा रहता है | बिच्छू के काटने का लक्षण (Symptoms of scorpion Sting): बिच्छू के काटने पर दंश वाले स्थान पर खुजली, सूजन व जलन के साथ तेज दर्द होता है । डंक मारे गए स्थान के चारों ओर लालिमा सी छा जाती है । वेदना अर्थात पीड़ा, डंक मारे गए स्थान से उठकर ऊपर की ओर फैलती सी महसूस होती है तथा एक दो घंटे के बाद वह स्थान सुन्न सा पड़ जाता है । बिच्छू के काटने पर बेचैनी, आंसू बहना, नाक से पानी बहना, मुह में लार अधिक बनना, पसीना अधिक आना, जी–मिचलाना, उल्टी आना इत्यादि लक्षण दिखाई दे सकते हैं । दौरे पड़ना व बाद में कोमा में चले
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सांप के काटने के लक्षण और ईलाज

सांप के काटने के लक्षणों एवं ईलाज पर प्रकाश डालने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की  सांप यानिकी सर्प अधिकतर ग्रामीण इलाकों में या जंगल के आसपास के इलाकों में पाये जाते हैं । साँपों की विभिन्न प्रजातियाँ झाड़ियों में, जंगल में, कूड़े में, खण्डहर में व वृक्ष के खोखले हुए भाग इत्यादि में छिपे रहते हैं । सांप के काटने के बारे में कहा जाता है की सामन्यतया सांप अपने आप नहीं काटते हैं लेकिन यदि इन पर गलती से या जानबूझकर आक्रमण किया जाए तो ये क्रोधित होकर काट लेते हैं । जहाँ तक अपने देश में साँपों की प्रजातियों का सवाल है भारत में कोबरा, क्रेट, वाइपर इत्यादि प्रजाति के सांप अधिक मात्रा में पाए जाते हैं । एक आंकड़े के मुताबिक हमारे देश भारतवर्ष में प्रत्येक वर्ष सांप के काटने से मरने वालों की संख्या तक़रीबन  20,000 है | अर्थात कहने का आशय यह है की भारतवर्ष में प्रत्येक साल सर्प दंश के कारण बीस हज़ार लोगों की मृत्यु हो जाती हैं जो की एक डरावना आंकड़ा है । इसी बात के मद्देनजर आज हम सांप के काटने के लक्षणों एवं ईलाज के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | सांप के काटने
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सांस के दौरे (अस्थमा) का ईलाज एवं सावधानियां

सांस के दौरे से हमारा आशय एक ऐसी बीमारी से है जिसमे सम्बंधित रोगी को खुलकर सांस नहीं आती है । इसमें रोगी न तो ढंग से बैठ पाता है और न ही ढंग से खड़ा हो पाता है । कहने का आशय यह है की सांस के दौरे के वक्त रोगी कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाता है | इस रोग में मुंह द्वारा दी गई औषधि लगभग बेअसर ही रहती है | और जहाँ तक इस बीमारी के होने का मुख्य कारण है वह है प्रदूषण यही कारण है की वर्तमान में यह रोग शहरों में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है । दमा अस्थमा का अटैक आने पर ईलाज (Treatment of Asthma Attack in Hindi): सांस के दौरे अर्थात अस्थमा का अटैक आने पर चिकित्सक द्वारा निम्न चिकित्सा की जा सकती है | चिकित्सक द्वारा रोगी को पम्प के द्वारा सालब्यूटामोल के 1-2 पफ लेने को कहे जा सकते हैं । इससे आराम न आने पर रोगी को एक पफ और लेने को डॉक्टर द्वारा परामर्शित किया जा सकता है । चिकित्सक द्वारा मरीज को अमीनोफाइलिन 250 मिग्रा. 10 से 20 मिली. सेलाइन में मिलाकर दिया जा सकता है | डॉक्टर द्वारा मरीज
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