गर्भावस्था एवं मिर्गी से सम्बंधित आवश्यक जानकारी.

गर्भावस्था एवं मिर्गी से समबन्धित कुछ जरुरी जानकारी देने से पहले हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं, की हम अपने पिछले दो लेखों के माध्यम से मिर्गी के कारण लक्षण एवं ईलाज, और मिर्गी की बीमारी के साथ आनंदमय जीवन जीने के तरीकों के बारे में वार्तालाप कर चुके हैं | इसलिए मिर्गी नामक इस रोग को समझने के लिए हमारे द्वारा लिखे यह लेख भी पढना नितांत आवश्यक है | यद्यपि मिर्गी नामक इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं के अंतर्मन में अपने स्वास्थ्य को लेकर अनेक प्रश्न होते हैं जिनका उचित जवाब एक डॉक्टर के अलावा और कोई नहीं दे सकता, लेकिन यहाँ पर महिलाओं के अंतर्मन में उठने वाले कुछ सामान्य प्रश्नों जैसे क्या मिर्गी से ग्रसित महिलाएं गर्भधारण कर सकती हैं? या वे महिलाएं जो गर्भ धारण करना नहीं चाहती, क्या वे गर्भ निरोधक दवाओं के साथ मिर्गी की दवाओं का सेवन कर सकती हैं?  इस लेख गर्भावस्था एवं मिर्गी से सम्बंधित कुछ जरुरी जानकारी के माध्यम से हम इन्हीं कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे | क्या मिर्गी से ग्रसित महिलाएं गर्भधारण कर सकती हैं गर्भावस्था एवं मिर्गी की यदि हम बात करे तो अधिकांशत: देखा जाता है की मिर्गी से ग्रस्त
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मिर्गी के दौरे के दौरान क्या करना चाहिए |

इससे पहले की हम यह जान लें की यदि किसी को मिर्गी का दौरा पड़े अर्थात मिर्गी के दौरे के दौरान हमें क्या करना चाहिए उससे पहले मिर्गी के मरीज को एक बात अवश्य जान लेनी चाहिए कि मिर्गी नामक यह बीमारी कोई जानलेवा बीमारी नहीं है | इसलिए  जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि मरीज को मिर्गी का दौरा ही पड़ा है या जब तक मिर्गी का दौरा 10 से 15 मिनट तक का न रहे, तब तक डाक्टर या एम्बुलेंस नहीं बुलाना  चाहिए । मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करें मिर्गी के दौरे के दौरान निम्नलिखित स्टेप उठाये जा सकते हैं | यदि किसी व्यक्ति को मिर्गी को दौरा पड़ जाय तो उसे सीधा या पेट के बल कभी भी उल्टा नहीं लिटाना चाहिए । मिर्गी के दौरे के दौरान मरीज को धीरे से करवट के बल लिटाया जा सकता है, ताकि रोगी के मुंह से निकलने वाले तरल पदार्थ आसानी से बाहर आ जाएँ । मिर्गी के रोगी का मुहं जबरदस्ती खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, न ही रोगी के मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश करनी चाहिए । रोगी के शरीर के जिस हिस्से में अकड़न हो, उसे पकड़ने या
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मिर्गी के साथ आनंदमय जीवन जीने के तरीके

मिर्गी के साथ आनंदमय जीवन जीने के तरीकों के बारे में हम विस्तार से वार्तालाप करेंगे लेकिन जैसा की हम अपने पिछले लेख में मिर्गी के लक्षणों कारणों एवं ईलाज की प्रक्रिया के बारे में बता चुके हैं इसलिए सबसे पहले मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों को हम सलाह देना चाहेंगे की अपने चिकित्सक द्वारा निर्देशित दवाई लेना कभी न भूलें। कभी भी अपने आप अपनी दवाओं में किसी प्रकार का कोई फेर-बदल न करें। कोई भी विपरीत प्रभाव दिखाई देने पर अपने डाक्टर को सूचित करें। और  डाक्टर से पूछे बिना अपने आप दवा लेना बन्द न करें। अपने डाक्टर से नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं । क्योंकि मिर्गी के साथ आनंदमय जीवन जीने में उपर्युक्त बातों का विशेष महत्व है | मिर्गी के साथ आनंदमय जीवन कैसे जिए : मिर्गी की बीमारी के साथ अक्सर जीवन में अलग-अलग तरह की मुश्किलें आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद पीड़ित व्यक्ति चाहे तो आनंदमय जिन्दगी व्यतीत कर सकते हैं | यदि मिर्गी से ग्रसित रोगी अपनी नियमित जिंदगी के लिए एक अच्छी योजना बना लें तो वह हर उस काम का आनंद उठा सकता हैं, जो वह करना चाहता है । मिर्गी के साथ आनंदमय जीवन जीने के लिए
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विटामिन K के फायदे, स्रोत, कमी के लक्षण एवं उपयोगिता

यदि हम सामान्य तौर पर Vitamin K की बात करें तो हम पाएंगे की इस विटामिन अर्थात विटामिन K  का सीधा सम्बन्ध रक्त जमने की प्रक्रिया से है । जब मनुष्य को किसी स्थान पर चोट लगने से कोई रक्त वाहिनी को क्षति पहुँचती है और उस नलिका से रक्त का स्राव होता है तो थोड़ी ही देर में रक्त गाढ़ा हो जाता है और उस स्थान पर एक गड्ढा-सा बनकर रक्त बहना बंद हो जाता है | यद्यपि इस रक्त जमने की प्रक्रिया से कई चीजें सम्बन्ध रखती हैं, उनमें से एक तत्व ‘प्रोथेम्बीन’ होता है, जिसका निर्माण यकृत अर्थात लिवर में होता है । इसके निर्माण के लिए रक्त अर्थात खून में विटामिन K की उपर्युक्त मात्रा में उपस्थिति बेहद आवश्यक होती है। इस विटामिन की न्यूनता से ‘प्रोथ्रोम्बीन’ की मात्रा कम हो जाती है और इस तरह रक्त जमने की क्रिया में विलम्ब हो सकता है । जब रक्त  में प्रोथ्रोम्बीन की मात्रा सामान्य की 35 प्रतिशत रह जाती है तब ऐसे व्यक्तियों में चोट आदि लगने से अथवा आप्रेशन के बाद रक्त जमने की क्रिया में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है । जब Vitamin K की अधिक कमी हो जाती है तो रक्त में प्रोथ्रोम्बीन
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मिर्गी की बीमारी के कारण लक्षण एवं ईलाज

मिर्गी की बीमारी पर इस लेख के माध्यम से हम विस्तृत तौर पर वार्तालाप करेंगे लेकिन अक्सर आपने अपने आस पास किसी व्यक्ति को अचानक जमीन पर गिरते देखा होगा और उसके बाद लोगों से सुना होगा की उसे मिर्गी का दौरा पड़ा है | जी हाँ मिर्गी की बीमारी की यदि हम बात करें तो यह गिरने की बीमारी ही होती है इसमें पीड़ित व्यक्ति दौरा पड़ने पर गिर पड़ता है | इसमें पीड़ित व्यक्ति का पूरा शरीर अकड़ जाता है जिसे Seizure Disorder कहते हैं | आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से मिर्गी की बीमारी के कारणों, लक्षणों एवं इसकी रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे | मिर्गी की बीमारी क्या है ? मिर्गी की बीमारी का उद्गम सर्वप्रथम ग्रीक भाषा के शब्द Epilepsia से हुआ है क्योंकि इसी ग्रीक शब्द से ही अंग्रेजी भाषा के शब्द Epilepsy की उत्पति हुई है जिसका हिन्दी में अर्थ गिरने की बीमारी यानिकी मिर्गी होता है | गिरने की बीमारी नामक शब्द इस बीमारी को इसलिए दिया है क्योंकि इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति स्नायु कोषों से निकलने वाले विद्युतीय प्रवाह में होने वाले परिवर्तन के कारण जमीन पर वास्तव में गिर जाता है ।
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आँखों की बीमारी एवं उनका प्रभावी उपचार.

Eye diseases से हमारा स्पष्ट आशय आँखों की बीमारी अर्थात समस्याओं से है नेत्र यानिकी आँख शरीर का वह अंग है जिससे मनुष्य या इस संसार में अन्य जीवधारी इस सृष्टि के दर्शन करता है । आँखों की जांच केवल आँखों के रोगों अर्थात Eye Diseases तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर की पूर्ण जांच का भी एक अहम् हिस्सा है । नेत्रों की जांच शरीर की अन्य बीमारी जैसे दिमाग, रक्त की धमनियां, शुगर इत्यादि के उपचार में अति सहायक होती है । नेत्र जांच कैसे की जाती है चिकित्सक द्वारा एक अच्छी टार्च बैटरी द्वारा आँख में बहुत कुछ देखा जा सकता है, इसमें चिकत्सक द्वारा यह पहचानने की कोशिश की जाती है कौन सी आँख ठीक है और कौन सी आँख रुग्ण अर्थात बीमार है | आँखों की जांच करने के लिए चिकित्सक द्वारा एक बार में एक आंख की जांच करने के लिए दूसरी आंख ढक ली जाती है और मरीज को Vision Chart देखने को कहा जाता है यानिकी दूर की वस्तु देखने को कहा जाता है तथा उसकी तुलना स्वस्थ आंख की नजर से की जाती है । ताकि अंदाजा लगाया जा सके कि नजर कितनी कम है | आँखों की
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विटामिन E के फायदे, स्रोत एवं कमी के लक्षण .

विटामिन E की यदि हम बात करें तो यह विटामिन भी विटामिन ए  और विटामिन ‘डी’ की भाँति वसा में घुलनशील होता है । जैसे की हर विटामिन की शरीर को स्वस्थ्य रखने में अग्रणी भूमिका होती है ठीक उसी प्रकार विटामिन ई की भी जीवधारी के शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखने में अहम भूमिका है | चूँकि यह विटामिन विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री में पाया जाता है इसलिए इसकी कमी अर्थात Deficiency को स्वस्थ आहार के माध्यम से ही पूर्ण अर्थात दूर किया जा सकता है | आज हम अपने इस लेख के माध्यम से Vitamin E के Sources अर्थात स्रोतों से लेकर विटामिन ई की कमी के लक्षणों तक के बारे में वार्तालाप करेंगे | तो आइये सर्वप्रथम यह जानने की कोशिश करते हैं की Vitamin E किन किन खाद्य पदार्थो में अधिक पाया जाता है | विटामिन E के स्रोत (Sources of Vitamin E in Hindi): विटामिन E के स्रोत की यदि हम बात करें तो यह विटामिन निम्न पदार्थों में अधिक पाया जाता है | गेहूँ के अंकुरों और उनके तेलों में Vitamin E की मात्रा अधिक पायी जाती है | बिनौले के तेल में इसकी अधिकता देखी जा सकती है | ताड़ के
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