Category: बीमारी

मिर्गी के दौरे के दौरान क्या करना चाहिए |

इससे पहले की हम यह जान लें की यदि किसी को मिर्गी का दौरा पड़े अर्थात मिर्गी के दौरे के दौरान हमें क्या करना चाहिए उससे पहले मिर्गी के मरीज को एक बात अवश्य जान लेनी चाहिए कि मिर्गी नामक यह बीमारी कोई जानलेवा बीमारी नहीं है | इसलिए  जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि मरीज को मिर्गी का दौरा ही पड़ा है या जब तक मिर्गी का दौरा 10 से 15 मिनट तक का न रहे, तब तक डाक्टर या एम्बुलेंस नहीं बुलाना  चाहिए । मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करें मिर्गी के दौरे के दौरान निम्नलिखित स्टेप उठाये जा सकते हैं | यदि किसी व्यक्ति को मिर्गी को दौरा पड़ जाय तो उसे सीधा या पेट के बल कभी भी उल्टा नहीं लिटाना चाहिए । मिर्गी के दौरे के दौरान मरीज को धीरे से करवट के बल लिटाया जा सकता है, ताकि रोगी के मुंह से निकलने वाले तरल पदार्थ आसानी से बाहर आ जाएँ । मिर्गी के रोगी का मुहं जबरदस्ती खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, न ही रोगी के मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश करनी चाहिए । रोगी के शरीर के जिस हिस्से में अकड़न हो, उसे पकड़ने या
Read More

मिर्गी की बीमारी के कारण लक्षण एवं ईलाज

मिर्गी की बीमारी पर इस लेख के माध्यम से हम विस्तृत तौर पर वार्तालाप करेंगे लेकिन अक्सर आपने अपने आस पास किसी व्यक्ति को अचानक जमीन पर गिरते देखा होगा और उसके बाद लोगों से सुना होगा की उसे मिर्गी का दौरा पड़ा है | जी हाँ मिर्गी की बीमारी की यदि हम बात करें तो यह गिरने की बीमारी ही होती है इसमें पीड़ित व्यक्ति दौरा पड़ने पर गिर पड़ता है | इसमें पीड़ित व्यक्ति का पूरा शरीर अकड़ जाता है जिसे Seizure Disorder कहते हैं | आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से मिर्गी की बीमारी के कारणों, लक्षणों एवं इसकी रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे | मिर्गी की बीमारी क्या है ? मिर्गी की बीमारी का उद्गम सर्वप्रथम ग्रीक भाषा के शब्द Epilepsia से हुआ है क्योंकि इसी ग्रीक शब्द से ही अंग्रेजी भाषा के शब्द Epilepsy की उत्पति हुई है जिसका हिन्दी में अर्थ गिरने की बीमारी यानिकी मिर्गी होता है | गिरने की बीमारी नामक शब्द इस बीमारी को इसलिए दिया है क्योंकि इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति स्नायु कोषों से निकलने वाले विद्युतीय प्रवाह में होने वाले परिवर्तन के कारण जमीन पर वास्तव में गिर जाता है ।
Read More

आँखों की बीमारी एवं उनका प्रभावी उपचार.

Eye diseases से हमारा स्पष्ट आशय आँखों की बीमारी अर्थात समस्याओं से है नेत्र यानिकी आँख शरीर का वह अंग है जिससे मनुष्य या इस संसार में अन्य जीवधारी इस सृष्टि के दर्शन करता है । आँखों की जांच केवल आँखों के रोगों अर्थात Eye Diseases तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर की पूर्ण जांच का भी एक अहम् हिस्सा है । नेत्रों की जांच शरीर की अन्य बीमारी जैसे दिमाग, रक्त की धमनियां, शुगर इत्यादि के उपचार में अति सहायक होती है । नेत्र जांच कैसे की जाती है चिकित्सक द्वारा एक अच्छी टार्च बैटरी द्वारा आँख में बहुत कुछ देखा जा सकता है, इसमें चिकत्सक द्वारा यह पहचानने की कोशिश की जाती है कौन सी आँख ठीक है और कौन सी आँख रुग्ण अर्थात बीमार है | आँखों की जांच करने के लिए चिकित्सक द्वारा एक बार में एक आंख की जांच करने के लिए दूसरी आंख ढक ली जाती है और मरीज को Vision Chart देखने को कहा जाता है यानिकी दूर की वस्तु देखने को कहा जाता है तथा उसकी तुलना स्वस्थ आंख की नजर से की जाती है । ताकि अंदाजा लगाया जा सके कि नजर कितनी कम है | आँखों की
Read More

Ear Diseases and Treatment – कानों के रोग एवं ईलाज |

Ear Diseases से हमारा अभिप्राय कान के रोगों यानिकी बीमारियों से है हालांकि शरीर में जितने भी अंग हैं उन सबकी अपनी एक अहम् भूमिका होती है और किसी एक अंग के बिना भी जीवधारियों का शरीर अधूरा लगता है | लेकिन इन सबके बावजूद किसी भी जीव के शरीर में कान अर्थात Ear नामक इस अंग की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है | इसलिए अक्सर होता क्या है की जब कोई भी व्यक्ति कान की समस्याओं अर्थात Ear Diseases problem से जूझता है तो तब उसे उस अंग की अहमियत का अंदाज़ा अधिक होता है और वह व्यक्ति कैसे भी करके उस रोग अर्थात बीमारी से मुक्ति पाना चाहता है ताकि यह रोग रोज रोज उसे परेशान न कर सके और वह अन्य क्रियाकलापों में अपना ध्यान लगा सके | हालांकि आज हम अपने इस लेख Ear Diseases and Treatment in hindi के माध्यम से कान के कुछ सामन्य रोगों एवं उनके ईलाज के बारे में जानने की कोशिश करेंगे लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं की यह कान मानव शरीर में कार्य कैसे करता है | कान कैसे कार्य करता है | मानव शरीर में निर्मित कान शरीर का ऐसा जटिल अंग है जिसमें लगभग एक
Read More

Tonsils के लक्षण, कारण एवं ईलाज की जानकारी |

Tonsils को समझने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की इस ब्रहमांड में जितने भी जीवधारी हैं बनाने वाले ने सबको बड़ी सोच समझकर बनाया है ठीक इसी प्रकार हमारे शरीर में कुदरत का बनाया एक अदभुत विभाग है जिसे रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System कहते हैं । इस प्रणाली का मुख्य काम शरीर में बाहर से आने वाली किसी नई चीज जैसे किटाणु, रोगाणु, इत्यादि के खिलाफ शरीर में फौज (AntiBodies) का निर्माण करना होता है  ताकि भविष्य में जब भी वह किटाणु या रोगाणु शरीर में आएं तो Anti Bodies उन्हें नष्ट करने में सक्षम हो सके । Immune System यानिकी बीमारी प्रतिरोधक प्रणाली का ही एक अंग होता है जिसे Tonsils कहते हैं यह हर व्यक्ति के गले के अंदर दोनों तरफ होते हैं | इसके अलावा एडिनायड जो तालु के ऊपर अर्थात नाक के पीछे स्थित होते हैं । शरीर में इनका काम प्राय: भोजन व सांस के द्वारा शरीर में घुसने वाली किसी भी नई चीज के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System को सचेत कर उचित Antibodies बनाने में सहायता प्राप्त करना होता है । बहुत बार या कई बार ऐसा हो सकता है की किटाणु व रोगाणुओं
Read More

पेट की रसौली के लक्षण, प्रकार एवं ईलाज – Stomach lump

पेट की रसौली से आशय पेट के अन्दर किसी अंग में गाँठ के होने से लगाया जाता है, किसी भी रोगी में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण लक्षण होता है | पेट की रसौली की समस्या आम तौर पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिकतर देखने को मिलती है वह भी बच्चेदानी में रसौली की समस्या इस समस्या का निवारण अर्थात ऑपरेशन वर्तमान में दूरबीन विधि द्वारा किया जाता है | पेट की रसौली को पेट के अंग विशेष के नाम से जाना जाता है जैसे यदि रसौली अर्थात गाँठ बच्चे दानी में हुई तो इसे बच्चेदानी की रसौली, गुर्दे में हुई तो गुर्दे की रसौली इत्यादि कहा जायेगा | पेट की रसौली का पता कैसे किया जाता है चिकित्सक द्वारा पेट की रसौली का पता करने के लिए मरीज को विभिन्न टेस्ट एवं जांच जैसे HB, ESR, TLC/DLC, Urine test, पेट का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, IVP गुर्दों के रंगीन एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन इत्यादि करने की सलाह दी जा सकती है |  इसके अलावा पेट के किस भाग या अंग में रसौली उत्पन्न हुई है का पता करने अर्थात कौन सी रसौली है का पता करने के लिए चिकित्सक द्वारा पेट को विभिन्न भागों में विभाजित किया जाता है
Read More

फिशर के कारण, लक्षण, ईलाज, मिथक एवं तथ्य |

अक्सर होता क्या है की गुदा अर्थात मलद्वार में होने वाले रोगों को फिस्टुला या बवासीर समझा जाता है जबकि फिशर अर्थात गुदाचीर इनसे भिन्न ही मलद्वार की एक बीमारी है | इससे अनेक भाषाओँ जैसे अंग्रेजी में Fissure तो हिन्दी में गुदाचीर तथा संस्कृत में इसे अर्श के नाम से भी जाना जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ रोग होता है ऐसा रोग जो शत्रु के समान व्यक्ति को हमेशा कष्ट देता रहे यह इसलिए कहा गया है क्योंकि इस रोग अर्थात बीमारी से ग्रसित रोगी को अत्याधिक दर्द होता रहता है सबसे सामान्य एवं बहु प्रचलित भाषा में इसे सूखी बवासीर के नाम से भी पहचाना जाता है । फिशर क्या होता है (What is Fissure in Hindi): जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की गुदा के हर प्रकार के रोग को आम तौर पर बवासीर या पाइल्स ही समझ लिया जाता है लेकिन फिशर इन रोगों से भिन्न होता है जिसे गुदाचीर भी कहते हैं | इस बीमारी में मलद्वार के आस पास के क्षेत्र में चीरा उभर के आ जाता है जिसे Fissure in Ano कहते हैं | हमारे द्वारा लिखे जाने वाले इस लेख का उद्देश्य आम जन मानस को गुदा क्षेत्र
Read More