आँखों की बीमारी एवं उनका प्रभावी उपचार.

Eye diseases से हमारा स्पष्ट आशय आँखों की बीमारी अर्थात समस्याओं से है नेत्र यानिकी आँख शरीर का वह अंग है जिससे मनुष्य या इस संसार में अन्य जीवधारी इस सृष्टि के दर्शन करता है । आँखों की जांच केवल आँखों के रोगों अर्थात Eye Diseases तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर की पूर्ण जांच का भी एक अहम् हिस्सा है । नेत्रों की जांच शरीर की अन्य बीमारी जैसे दिमाग, रक्त की धमनियां, शुगर इत्यादि के उपचार में अति सहायक होती है ।

आँखों की बीमारी Eye-diseases-and-treatment-in-hindi

नेत्र जांच कैसे की जाती है

चिकित्सक द्वारा एक अच्छी टार्च बैटरी द्वारा आँख में बहुत कुछ देखा जा सकता है, इसमें चिकत्सक द्वारा यह पहचानने की कोशिश की जाती है कौन सी आँख ठीक है और कौन सी आँख रुग्ण अर्थात बीमार है | आँखों की जांच करने के लिए चिकित्सक द्वारा एक बार में एक आंख की जांच करने के लिए दूसरी आंख ढक ली जाती है और मरीज को Vision Chart देखने को कहा जाता है यानिकी दूर की वस्तु देखने को कहा जाता है तथा उसकी तुलना स्वस्थ आंख की नजर से की जाती है । ताकि अंदाजा लगाया जा सके कि नजर कितनी कम है |

आँखों की बीमारी एवं ईलाज (Eye Diseases and treatment in hindi):

आँखों की बीमारी नज़र कम होने का मुख्य लक्षण यह है की बिना दर्द के यह धीरे धीरे कम होने लगती है | चश्मे का नंबर घट बढ़ जाना भी आँखों का एक रोग होता है जिसे Refractive error कहा जाता है इसका ईलाज उपयुक्त नंबर का चस्मा पहनना या लेज़र किरणों द्वारा ऑपेरशन होता है | वयस्क अर्थात 18 साल की उम्र के बाद चश्मे का नंबर एकदम सटीक होना नितांत आवश्यक है | ऐसा नहीं होने पर सिरदर्द, भारीपन, चिड़चिड़ापन इत्यादि हो सकता है | चूँकि 9 साल की उम्र तक दृष्टि का पूर्ण विकास होता है इसलिए बच्चों को चश्मा हर वक्त लगाना अति आवश्यक होता है | अगर उपर्युक्त दिशानिर्देश नहीं माने गए तो नजर स्थायी तौर पर कम हो सकती है जिससे भैंगापन आ सकता है |

आँखों की बीमारी भैंगापन :

आँखों की बीमारी की यदि बात करें तो भैंगापन नामक यह रोग अधिकतर बचपन में होता है । इसका ईलाज चश्मा अथवा आपरेशन है जोकि भैंगेपन किस प्रकार का है पर निर्भर करता है । यदि भैंगेपन की वजह से किसी बच्चे की नजर में कमी हुई हो तो इसका ईलाज की 9 साल की उम्र तक ही संभव होता है । इसके बाद केवल कास्मैटिक इलाज के द्वारा इसे ठीक करने की कोशिश की जा सकती है ।

आँखों की बीमारी सफेद मोतिया :

यह आँखों की बीमारी चालीस वर्ष की उम्र के बाद अधिक होता है कहने का आशय यह है की यह रोग 40 वर्ष की उम्र के बाद नजर कम होने का मुख्य कारण होता है । इस आँख की बीमारी में आँखों लैंस में पारदर्शिता खत्म होकर धुंधलापन आ जाता है । इसलिए सफेद मोतिया नामक इस बीमारी का ईलाज केवल आपरेशन होता है । फैको विधि द्वारा लैंस फिट करना इस रोग का नवीनतम ईलाज है इस ऑपरेशन के बाद मरीज जल्दी ही अपनी दिनचर्या शुरू कर सकता है ।

काला मोतिया (Glaucoma) :

काला मोतिया को Glaucoma भी कहा जाता है यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, Open Angel Glaucoma और Angel Closer Glaucoma | प्रथम प्रकार के काला मोतिया में समय के साथ दबाव धीरे धीरे दृष्टि तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता जाता है वही दुसरे प्रकार का Glaucoma अचानक प्रकट होकर तेजी से बढ़ता है | यद्यपि यह रोग चालीस उम्र के बाद अधिक होते हैं इसमें व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है, आँखे लाल एवं आँखों में तेज दर्द हो सकता है इस रोग का पूर्ण रूप से ईलाज नहीं किया जा सकता और इस आँखों की बीमारी से आँखों को जितना नुकसान हो गया हो उसे भी ठीक नहीं किया जा सकता किन्तु इसमें और आगे हो सकने वाले नुकसान अर्थात दृष्टि की हानि को रोका जा सकता है | चिकित्सक द्वारा आरंभिक ईलाज में कुछ दवाइयां दी जा सकती हैं जिन्हें आँखों में डालने को कहा जा सकता है | ग्लूकोमा के मरीज को जीवन भर इसका उपचार कराना होता है | अक्सर 40 उम्र के बाद महिलाओं में भी ज्यादा, प्लस चश्मे का नंबर, आँखों में दर्द रहना आँखे लाल एवं उनसे पानी आने की समस्या हो सकती है इसके लिए चिकित्सक द्वारा टेबलेट Diamox/Acmox या Glucomol/Pilocorpine इत्यादि दी जा सकती हैं |

आँख के फोले की बीमारी :

आँखों में फोले अक्सर विटामिन ए की कमी, जख्म के निशान, चोट के कारण होते हैं । जहाँ तक इनके ईलाज अर्थात ट्रीटमेंट का सवाल है उसमे चश्मा, कांटैक्ट लैंस अथवा पुतली बदलने की प्रक्रिया (Keraloplesty) सम्मिलित है । साठ साल की उम्र के बाद पर्दे का सूखापन (ARMD) भी नज़र में कमी आने का एक मुख्य कारण रहा है ।

आँख का लाल होना :

कभी कभी होता क्या है की बिना दर्द के आँख लाल हो जाती है इसका पता व्यक्ति को तब लगता है जब वह स्वयं शीशा देख रहा हो या फिर किसी पारिवारिक सदस्य या दोस्त ने उससे इस बारे में कहा हो इस प्रकार की आँखों की समस्या का मुख्य कारण एलर्जी है ।इसके मुख्य लक्षणों में खारिश के साथ पानी आना, आंख का नहीं चिपकना सम्मिलित है । इस समस्या का ईलाज यह है की ठण्डे पानी/बर्फ के पानी से आँखों को धो लेना चाहिए ।इसके अलावा चिकित्सक द्वारा मरीज को कुछ Soothing Drops जैसे Ket Plus इत्यादि |

आँख का लाल होना (गन्द आना):

आँखों की इस बीमारी को Conjunctivitis भी कहते हैं इस बीमारी की पहचान कीटाणु बैक्टीरिया अथवा वायरस द्वारा लाल होना, आँखों से गंद आना, पलकों का चिपकना, हल्का मामूली दर्द होना इत्यादि हैं । जहाँ तक इसके ईलाज का सम्बन्ध है चिकित्सक द्वारा कुछ  Antibiotic Drop जैसे  0flaren, Tobaren Soothing Drops जैसे  Talomin-M इत्यादि दी जा सकती हैं |

लाल आँख एवं दर्द :

इसके लक्षण आँख में जख्म (Corneal Ulcer) बैक्टीरिया, फफूदी या (Fungus) खुरक, लाल, सोजश, नजर में कमी  इत्यादि देखे जा सकते हैं  । इसके ईलाज के लिए चिकित्सक द्वारा कुछ Antibiotics  जैसे  0flaren, Tobaren,  Gatiquin/Neosporin मलहम इत्यादि दिए जा सकते हैं इसके अलावा  रात को दर्द निवारक दवा जैसे IBusule/Combiflam इत्यादि दिए जा सकते हैं |

आँख की सोजश :

आँख की सोजश की लक्षणों की यदि हम बात करें तो इसमें आँख में दर्द, लाली, नजर में कमी, पुतली का सिकुड़ना,  इत्यादि हो सकते हैं | इसके लिए चिकित्सक द्वारा मरीज को Steroid Drop जैसे DexOrens/ToburenD एवं  दर्द निवारक दवा जैसे Combiflam इत्यादि जरूरत के अनुसार दी जा सकती है |

आँखों के अन्य रोग एवं उपचार :

  • आँख में फुंसी अर्थात दर्द के साथ पलक पर सूजन हो तो इस स्थिति में आँखों में गर्म पानी का सेक किया जा सकता है |
  • जब पलक के बाल मुड़कर कोर्निया को स्पर्श करके जख्म कर देते हैं । तो इस रोग को पडवाल कहा जाता है हालंकि इसका स्थायी ईलाज आपरेशन है किन्तु आराम के लिए चिकित्सक द्वारा कुछ मलहम जैसे Terramycin oflox दिन के समय लगाने को दी जा सकती है |
  • जब आंख की झिल्ली बढ़कर कोर्निया पर आ जाती है तो इसे नाखुन कहते हैं समस्या बढ़ जाने पर इसका भी स्थायी ईलाज ओपरेशन ही होता है लेकिन चिकित्सक द्वारा मरीज को आराम देने हेतु कुछ Soothing Drops जैसे Talomin-M इत्यादि दी जा सकती हैं |
  • आंख के नाक वाले कोने से गंद आना, दर्द रहना, सोजश होना इत्यादि नासुर के लक्षण होते हैं इसका ईलाज DCR आपरेशन होता है ।
  • यदि किसी के आँख में चोट लग जाय और उससे रसायनिक पदार्थ गिरने लगे तो आँख को ताजे पानी अर्थात Normal Saline से पलक खोलकर तुरंत अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए उसके बाद चिकित्सक द्वारा सुझाई गई एंटी बायोटिक ड्राप डालें|
  • आँख में चोट या कचरा चले जाने पर यदि यह आँख के अन्दर दिख रहा है तो उसे साफ़ रुमाल या अन्य कपड़े से निकाल लें | उसके बाद चिकित्सक द्वारा सुझाई गई एंटीबायोटिक मलहम डालकर दर्द निवारक दवा दे सकते हैं ।
  • पलक की चोट लगने पर Betadine से साफ कर मलहम लगाकर पट्टी कर सकते हैं । यदि टांकों की आवश्यकता हो तो किसी विशेषज्ञ द्वारा ही टाँके करवाएं ।
  • यदि आँख में चोट क्रिकेट बाल, किसी एक्सीडेंट की वजह से, पटाखा जलाते हुए इत्यादि लग जाय तो चिकित्सक द्वारा टैटनस का टीका लगाया जा सकता है इसके अलावा कुछ दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक ड्राप, मलहम इत्यादि दी जा सकती हैं |
  • एकदम नज़र होने के कई कारण जैसे रक्त धमनी की रुकावट, Anti Ischae mc optic neuropathy, शुगर के मरीजों में Vitreos Hgr, CSR & Maculor Edema,Optic Neuritis, Ocipital Lobe इत्यादि हो सकता है |
  • आँखों की बीमारी जैसे भैंगापन, बच्चे की आँख न खुलना, Orbitial Cellitis, काला मोतिया, काले धब्बे दिखाई न देना, एक की जगह दो दिखाई देना, शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, गठिया के मरीजो परदे एवं नस की बीमारी के समय समय पर जाँच अवश्य करानी चाहिए |

अन्य सम्बंधित पोस्ट:

दूरबीन विधि द्वारा ऑपरेशन की पूर्ण जानकारी |

फिशर के लक्षण, कारण, ईलाज पूरी जानकारी |

हर्निया के कारण, प्रकार, भ्रांतियां एवं ईलाज की जानकारी |

फिस्टुला अर्थात भगन्दर के लक्षण, कारण एवं उपचार |

आँतों की टी. बी. अर्थात पेट की टी.बी. के लक्षण जांच एवं ईलाज |

पेट के अल्सर के लक्षण, कारण एवं ईलाज की जानकारी |  

पेट की रसौली के प्रकार, लक्षण एवं ईलाज |

टॉन्सिल्स के लक्षण, कारण एवं ईलाज की पूरी जानकारी |

कानों के विभिन्न रोग एवं उनके ईलाज की जानकारी |  

Disclaimer:

Health Information In Hindi यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयत्न करता है, की इसके द्वारा दी जाने वाली जानकारी सटीक एवं वास्तविक हो, लेकिन दी गई किसी भी जानकारी को चिकित्सकीय अनुसन्धान या अन्य किसी अनुसन्धान का वर्तमान प्रतिबिम्ब नहीं माना जाना चाहिए | क्योंकि ये निरंतर बदलती रहती हैं यदि कोई भी पाठक गण किसी भी समस्या से ग्रसित हैं तो उन्हें समबन्धित क्षेत्र के विशेषज्ञों चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए | Health Information in Hindi अपनी वेबसाइट के माध्यम से दी जाने वाली जानकारी या इस वेबसाइट के माध्यम से दिए गए किसी तृतीय पक्ष के वेबसाइट के लिंक, की जानकारी में चूक/त्रुटी के कारण होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान या क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं होगा |

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *