Category: फिटनेस

अस्थमा के लिए योग -Yoga for Asthma in Hindi.

दमा अर्थात अस्थमा फेफड़ो से समबन्धि रोग है आज हम हमारे इस लेख अस्थमा के लिए योग (Yoga for Asthma in Hindi ) में ऐसे आसनों अर्थात योग क्रियाओं के बारे में जानेंगे जिन्हें दमा अर्थात अस्थमा के मरीज भी कर सकते हैं | अस्थमा से ग्रसित मरीज को धूल, धुएं वाले वातावरण में सांस लेने में बेहद तकलीफ होने लगती है अर्थात ऐसी जगह जहाँ ऑक्सीजन की कमी हो अस्थमा या दमा से ग्रसित रोगी को काफी परेशानी होने लगती है | ऐसे में अक्सर रोगी ऐसे योगासनों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें इस रोग को नियंत्रित रखने या कम करने में सहायक हों | इसी बात के मद्देनज़र आज हमारे इस लेख का लक्ष्य Yoga For Asthma in Hindi के माध्यम से ऐसी योग क्रियाओं के बारे में जानने का है जो इस रोग को नियंत्रित या कम करने में सहायक हैं या इस रोग के बावजूद इस प्रकार की योग क्रियाएं की जा सकती हैं | अस्थमा के लिए योग शलभासन: Yoga for Asthma in Hindi में अर्थात अस्थमा के लिए योग में पहला आसन शलभासन है इसे करने के लिए  सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेटना होता है | और उसके
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Yoga Myth Facts Hindi- योग भ्रांतियां एवं तथ्य |

Yoga Myth and Facts से हमारा आशय योगा के बारे में समाज में व्याप्त भ्रामक धारणाओं एवं तथ्यों से है | योग का विकास जीवन जीने की एक कला के रूप में विकसित हुआ, लेकिन हमारे समाज में योगा समबन्धि अनेक भ्रामक धारणायें फैली हुई हैं जिनका विश्लेषण हम आज अपने इस लेख के माध्यम से करने वाले हैं | योग के बारे में लोग तरह तरह की बातें कह सकते हैं लेकिन सच्चाई यह है की योग किसी भी मनुष्य के तन, मन को सुन्दर एवं स्वच्छ बनाने का एक सहज एवं सुलभ मार्ग है | वर्तमान में भी योग के माध्यम से लोगों द्वारा अपने तन, मन को स्वच्छ बनाने का कार्य निरंतर जारी है लेकिन साथ ही कुछ भ्रामक धारणाओं के चलते मनुष्य के मन में योग की छवि कुछ भी बन सकती है | इसलिए इसी बात के मद्देनज़र आज हम अपने Yoga Myth and Facts in Hindi नामक लेख में भ्रांतियों एवं तथ्यों के बारे में जानेंगे | Yoga Myth and facts in Hindi: हालांकि योगा के बारे में भ्रामक धारणाएं या मिथक बहुत ज्यदा प्रचलित होंगे लेकिन यहाँ पर हम कुछ प्रचलित भ्रांतियों का ही वर्णन एवं तथ्यों अर्थात Yoga Myth and facts
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डायबिटीज के लिए योगासन Yoga For Diabetes in Hindi.

डायबिटीज के लिए योगासन पर बात करने से पहले यह जान लेना जरुरी होता है की योगा की किसी भी बीमारी को नियंत्रित करने या जड़ से खत्म करने में अहम भूमिका मिलती आई है चूँकि वर्तमान में लोगों की शारीरिक क्रियाकलापों में भारी मात्रा में कमी आई है जिसके चलते जाने अनजाने में जो योग क्रियाएं किसी व्यक्ति या महिला द्वारा हो जाया करती थी अब वो भी नहीं होती हैं इसलिए वर्तमान में डायबिटीज जैसी बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और वर्तमान में हर उम्र के लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं भी लेकिन जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं इस बीमारी का पूर्ण रूप से इलाज संभव नहीं है लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रख पाता हा तो वह आम आदमी की जिंदगी आराम से जी सकता है आज हम अपने इस लेख के माध्यम से डायबिटीज के लिए योगासन की बात करेंगे | शीर्षासन : डायबिटीज के लिए योगासन में पहला आसन शीर्षासन है इस आसन का यदि हम शाब्दिक अर्थ निकालेंगे तो हम पाएंगे की यह शीर्ष और आसन दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है | जिसमे शीर्ष का अर्थ सिर के अग्रभाग से
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योगा की सावधानियां/नियम – Rules of yoga in Hindi

योगा की सावधानियां योगाभ्यास करने के दौरान बरती जाती हैं अर्थात इनसे हमारा अभिप्राय ऐसे योग के नियम एवं सावधानियों से है जिन्हें योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी व्यक्ति या महिला को अपनाने की आवश्यकता होती है | इसलिए प्रत्येक वह व्यक्ति जो योगभ्यास करने जा रहा हो उसे निम्नलिखित योगा की सावधानियां अपनानी पड़ सकती हैं | शायद आपने ध्यान दिया होगा की जब भी किसी व्यक्ति द्वारा किसी मकान का निर्माण किया जाता है, तो उसकी नींव पर विशेष ध्यान देकर उसको मज़बूत बनाने की भरपूर कोशिश की जाती है | ताकि उस पर खड़ी होने वाली इमारत बहुत दिनों तक स्थाई बनी रहे वैसे ही यदि हम योग क्रिया से संबंधित नियम व सावधानियों को अपने जीवन में उतारते हैं तो हमारे जीवन में होने वाली कई प्रकार की कठिनाईयों का हल अपने आप ही हो जाता है। योगाभ्यास के दौरान बरती जाने वाली योगा की सावधानियां: किसी योग्य प्रशिक्षक की देख-रेख में ही योगासन एवं योग की क्रियाओं का अभ्यास किया जाना चाहिए । किसी भी योगासन को करें, परंतु मूल अवस्था में लौटते समय क्रिया का क्रम विपरीत ही होना चाहिए जैसा अंतिम अवस्था में पहुँचने के पहले था। योगा की सावधानियां कहती
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पीरियड्स के दौरान योग के आसन

पीरियड्स के दौरान योग करने से इसमें होने वाले दर्द और थकान से राहत मिल सकती है यद्यपि कुछ महिलाओं को लगता है की इस समय सिर्फ आराम पर ध्यान देना चाहिए। यही कारण है की पीरियइस के दौरान योग करें या न करें  इसे लेकर महिलाओं के मन में भ्रम बना रहता है | आज हम इसी भ्रम को कुछ कम करने की कोशिश करेंगे | जैसा की हम सबको विदित है की योग सेहत के लिए संजीवनी है। एक ऐसी संजीवनी, जिससे बहुत सारी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। मगर क्या उन खास दिनों में योग करना सही है, जब महिलाएं शारीरिक कष्ट से गुजर रही होती हैं। सिर दर्द, पेट दर्द, थकान, अत्यधिक रक्तस्राव, पीरियड्स के दौरान होने वाले इन कष्टों के बीच योग किया जा सकता है, लेकिन पीरियड्स के दौरान योग करते वक्त महिलाओं को कुछ सावधानियां अवश्य बरतनी पड़ेंगी |हालांकि अक्सर देखा गया है की इसमें होने वाले दर्द से महिलाएं काफी परेशान रहती हैं। कुछ महिलाओं के लिए यह आम बात होती है, लेकिन कुछ के लिए यह शरीर तोड़ देने वाला वक्त होता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान योग व व्यायाम न केवल सुरक्षित है, बल्कि आपके शरीर के लिए
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वेगन डाइट क्या है और कैसे मोटापे को कम करने में है सहायक |

वेगन डाइट (Vegan Diet) का अर्थ एक ऐसे आहार से लगाया जाता है जिसमे केवल और केवल पौधे और पौधों से उत्पादित खाद्य पदार्थ सम्मिलिति होते हैं | सामान्य तौर पर हम यदि देखें तो वेगन डाइट को हम शाकाहारी आहार भी कह सकते हैं इसमें अनाज, सब्जियां, फल,नट इत्यादि सामिलित हैं | जिसमे माँसाहारी भोजन पशुओं से उत्पादित भोजन जैसे मीट, चिकन अंडा इत्यादि सम्मिलित न हो वह वेगन डाइट कहलाती है | मोटापे से छुटकारा पाने की चाहत में कई लोग ‘वेगन डाइट अपना तो लेते हैं फिर भी उनका वजन कम नहीं हो पाता वह इसलिए क्योंकि लोगों के दिमाग में बैठ गया है कि वेगन डाइट उन्हें स्लिम-ट्रिम कर देगी। वेगन डाइट से वजन कैसे कम करें? लोगों को यह वहम हो गया है की वेगन डाइट उन्हें बिना नियमों का नुसरन किये हुए पतला कर देगी या उनका वजन घटा देगी | लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है कुछ लोगों पर तो इसका उल्टा असर होता है। पतले होने की बजाय वह पहले से भी मोटे होने लगते हैं। इसका कारण है कुछ गलत आदतें, जो वेगन डाइट लेने के बावजूद उनके ‘वेट लूज मिशन को फेल कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है
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लंच के बाद 20-30 मिनट रोजाना टहलने के फायदे |

लंच के बाद 20-30 मिनट रोजाना टहलने के बहुत सारे फायदे होते हैं चूँकि वर्तमान में तकनिकी वस्तुओं के बढ़ते उपयोग एवं लोगों के जीवनशैली में हो रहे धीरे धीरे सुधार के कारण लोगों के पास शारीरिक कार्यों में कमी देखी जा सकती है | यही कारण है की लोगों की फिटनेस में निरंतर कमी देखने को मिल रही है अर्थात लोगों में वजन बढ़ने के साथ, शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने के कारण हृदयघात जैसी समस्या देखने को मिलती हैं | और यदि मनुष्य शारीरिक अभ्यास न करे तो उसका पेट, वजन इत्यादि बढ़ सकते हैं जिससे भविष्य में बहुत सारी हेल्थ सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं हालांकि वर्तमान में लोगों की इस भागदौड़ भारी जिंदगी में फिटनेस के लिए समय निकालना थोडा मुश्किल जरुर है लेकिन असम्भव नहीं और वो भी समय कितना निकालना है सिर्फ 20-30 मिनट वो भी लंच करने के बाद अधिकतर कंपनियां कम से कम आधे घंटे का तो कुछ अधिक समय का लंच ब्रेक अपने कर्मचारियों को अवश्य देती हैं फिटनेस की या टहलने की चाह रखने वाला व्यक्ति इसी समय का फायदा उठाकर 20-30 मिनट रोजाना लंच के बाद टहल सकता है | और सिर्फ लंच के बाद कुछ मिनट
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