विटामिन डी की पूरी जानकारी – Vitamin D information

विटामिन डी नामक यह विटामिन भी विटामिन ए की तरह ही तेल के रूप में होता है  चूँकि इस विटामिन की कमी से Rickets (रिकेट्स) नामक रोग होता है इसलिए इस विटामिन को ‘एन्टीरेकेटिक विटामिन’ (antirachitic vitamin) भी कहा जाता है। यह विटामिन वसा में घुलनशील होता है | विटामिन डी का मनुष्य शरीर में स्वत: निर्माण होता है, इसके निर्माण के लिए सूर्य किरणों की आवश्यकता होती है । अक्सर होता क्या है की शरीर में त्वचा अर्थात स्किन के नीचे एक विशेष रासायनिक पदार्थ उपस्थित रहता है जिसे ‘डीहाइड्रोक्सी कोलेस्ट्रोल’(Dehydrocholesterol) कहते हैं । यह पदार्थ सूर्य की किरणों में निहित शक्ति से, हमारे शरीर में Vitamin D के रूप में परिणित हो जाता है । विटामिन डी की विशेषताएं (Features of Vitamin D in Hindi): यद्यपि जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की इस विटामिन अर्थात विटामिन डी का निर्माण शरीर में स्वत: होता रहता है लेकिन खान पान अर्थात भोजन से भी इसका समबन्ध है | विटामिन डी के बारे में और विस्तृत तौर पर समझने के लिए हमें इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालना होगा तो आइये जानते हैं इस विटामिन की मुख्य विशेषताएं क्या क्या हैं | पशुओं से प्राप्त खाद्य पदार्थ
Read More

Tonsils के लक्षण, कारण एवं ईलाज की जानकारी |

Tonsils को समझने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की इस ब्रहमांड में जितने भी जीवधारी हैं बनाने वाले ने सबको बड़ी सोच समझकर बनाया है ठीक इसी प्रकार हमारे शरीर में कुदरत का बनाया एक अदभुत विभाग है जिसे रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System कहते हैं । इस प्रणाली का मुख्य काम शरीर में बाहर से आने वाली किसी नई चीज जैसे किटाणु, रोगाणु, इत्यादि के खिलाफ शरीर में फौज (AntiBodies) का निर्माण करना होता है  ताकि भविष्य में जब भी वह किटाणु या रोगाणु शरीर में आएं तो Anti Bodies उन्हें नष्ट करने में सक्षम हो सके । Immune System यानिकी बीमारी प्रतिरोधक प्रणाली का ही एक अंग होता है जिसे Tonsils कहते हैं यह हर व्यक्ति के गले के अंदर दोनों तरफ होते हैं | इसके अलावा एडिनायड जो तालु के ऊपर अर्थात नाक के पीछे स्थित होते हैं । शरीर में इनका काम प्राय: भोजन व सांस के द्वारा शरीर में घुसने वाली किसी भी नई चीज के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System को सचेत कर उचित Antibodies बनाने में सहायता प्राप्त करना होता है । बहुत बार या कई बार ऐसा हो सकता है की किटाणु व रोगाणुओं
Read More

विटामिनों के प्रयोग के समबन्ध में दिशानिर्देश | Guidelines to use vitamins in Hindi.

विटामिनों का शरीर को स्वस्थ रखने में बड़ा अहम योगदान होता है लेकिन यह हर बार जरुरी नहीं होता है की यदि शरीर में कोई विटामिन जा रहा है तो उसका शरीर को फायदा ही होगा विटामिनों के ओवरडोज़ के नुकसान भी हो सकते हैं | इसके अलावा विटामिन कब लिए जाएँ अर्थात उनके लेने का समय क्या होना चाहिए यह भी बेहद जरुरी होता है क्योंकि असमय विटामिन लेने पर ये शरीर को अपेक्षित लाभ नहीं दे पाते हैं | शरीर में विटामिनों की कमी की पूर्ति किस माध्यम से अधिक लाभकारी होती है इस बात का भी ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है | इन्ही सब बातों के मद्देनज़र आज हम अपने इस लेख ‘’विटामिनों के प्रयोग करने के दिशानिर्देशों’’ में कुछ जरुरी दिशानिर्देशों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | विटामिनों के प्रयोग के मुख्य दिशानिर्देश (Guidelines to use Vitamins in Hindi): विटामिनों के प्रयोग के सम्बन्ध में कुछ मुख्य दिशानिर्देश इस प्रकार से हैं | प्रत्येक विटामिन वाली औषधि अर्थात दवाई का भोजन के बाद ही प्रयोग कराना अधिक लाभकारी सिद्ध होता है, क्योंकि भोजन के बाद वह विटामिन विशेष भोजन के साथ मिलकर शरीर में उस विटामिन की कमी को दूर करता है
Read More

विटामिन C के स्रोत, लाभ एवं इसकी कमी से होने वाले रोग |

विटामिन C की यदि हम बात करें तो यह जल में घुलनशील विटामिन है यह विशुद्ध रासायनिक एस्कार्बिक एसिड है जिसका उपयोग औषधि अर्थात दवाई के रूप में किया जाता है |  कहा यह जाता है की 1 मिली ग्राम विटामिन C (एस्कार्बिक एसिड) 20 अन्तर्राष्ट्रीय यूनिट के बराबर होता है । इस प्रकार का यह विटामिन बिना रंग और बिना गन्ध के कणों में पाया जाता है, इसका स्वाद खट्टा होता है । Vitamin C रुधिर के लाल कण बनाने में बहुत ही आवश्यक होता है इसलिए आज हम हमारे Vitamins and Minerals नामक श्रेणी में Vitamin C के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | ताकि हमारे पाठकगण इसकी उपयोगिता एवं इसकी कमी से से होने वाले लक्षणों के बारे में जानकर समय पर इसकी कमी को अपने शरीर में पूर्ण कर सकें | विटामिन सी की कमी से होने वाले रोग: शरीर में विटामिन सी की कमी होने पर निम्नलिखित बीमारियों अर्थात रोगों के पैदा होने की आशंका रहती है | यदि किसी के शरीर में विटामिन C की कमी हो जाए तो हो सकता है की कैपीलरीज अर्थात रक्त कोशिकाओं की दीवारें फटने लग जाएँ और रोगी के शरीर में कीटाणु पहुँचकर संक्रमण फैलाकर कोई
Read More

अस्थमा के लिए योग -Yoga for Asthma in Hindi.

दमा अर्थात अस्थमा फेफड़ो से समबन्धि रोग है आज हम हमारे इस लेख अस्थमा के लिए योग (Yoga for Asthma in Hindi ) में ऐसे आसनों अर्थात योग क्रियाओं के बारे में जानेंगे जिन्हें दमा अर्थात अस्थमा के मरीज भी कर सकते हैं | अस्थमा से ग्रसित मरीज को धूल, धुएं वाले वातावरण में सांस लेने में बेहद तकलीफ होने लगती है अर्थात ऐसी जगह जहाँ ऑक्सीजन की कमी हो अस्थमा या दमा से ग्रसित रोगी को काफी परेशानी होने लगती है | ऐसे में अक्सर रोगी ऐसे योगासनों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें इस रोग को नियंत्रित रखने या कम करने में सहायक हों | इसी बात के मद्देनज़र आज हमारे इस लेख का लक्ष्य Yoga For Asthma in Hindi के माध्यम से ऐसी योग क्रियाओं के बारे में जानने का है जो इस रोग को नियंत्रित या कम करने में सहायक हैं या इस रोग के बावजूद इस प्रकार की योग क्रियाएं की जा सकती हैं | अस्थमा के लिए योग शलभासन: Yoga for Asthma in Hindi में अर्थात अस्थमा के लिए योग में पहला आसन शलभासन है इसे करने के लिए  सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेटना होता है | और उसके
Read More

पेट की रसौली के लक्षण, प्रकार एवं ईलाज – Stomach lump

पेट की रसौली से आशय पेट के अन्दर किसी अंग में गाँठ के होने से लगाया जाता है, किसी भी रोगी में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण लक्षण होता है | पेट की रसौली की समस्या आम तौर पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिकतर देखने को मिलती है वह भी बच्चेदानी में रसौली की समस्या इस समस्या का निवारण अर्थात ऑपरेशन वर्तमान में दूरबीन विधि द्वारा किया जाता है | पेट की रसौली को पेट के अंग विशेष के नाम से जाना जाता है जैसे यदि रसौली अर्थात गाँठ बच्चे दानी में हुई तो इसे बच्चेदानी की रसौली, गुर्दे में हुई तो गुर्दे की रसौली इत्यादि कहा जायेगा | पेट की रसौली का पता कैसे किया जाता है चिकित्सक द्वारा पेट की रसौली का पता करने के लिए मरीज को विभिन्न टेस्ट एवं जांच जैसे HB, ESR, TLC/DLC, Urine test, पेट का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, IVP गुर्दों के रंगीन एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन इत्यादि करने की सलाह दी जा सकती है |  इसके अलावा पेट के किस भाग या अंग में रसौली उत्पन्न हुई है का पता करने अर्थात कौन सी रसौली है का पता करने के लिए चिकित्सक द्वारा पेट को विभिन्न भागों में विभाजित किया जाता है
Read More

Yoga Myth Facts Hindi- योग भ्रांतियां एवं तथ्य |

Yoga Myth and Facts से हमारा आशय योगा के बारे में समाज में व्याप्त भ्रामक धारणाओं एवं तथ्यों से है | योग का विकास जीवन जीने की एक कला के रूप में विकसित हुआ, लेकिन हमारे समाज में योगा समबन्धि अनेक भ्रामक धारणायें फैली हुई हैं जिनका विश्लेषण हम आज अपने इस लेख के माध्यम से करने वाले हैं | योग के बारे में लोग तरह तरह की बातें कह सकते हैं लेकिन सच्चाई यह है की योग किसी भी मनुष्य के तन, मन को सुन्दर एवं स्वच्छ बनाने का एक सहज एवं सुलभ मार्ग है | वर्तमान में भी योग के माध्यम से लोगों द्वारा अपने तन, मन को स्वच्छ बनाने का कार्य निरंतर जारी है लेकिन साथ ही कुछ भ्रामक धारणाओं के चलते मनुष्य के मन में योग की छवि कुछ भी बन सकती है | इसलिए इसी बात के मद्देनज़र आज हम अपने Yoga Myth and Facts in Hindi नामक लेख में भ्रांतियों एवं तथ्यों के बारे में जानेंगे | Yoga Myth and facts in Hindi: हालांकि योगा के बारे में भ्रामक धारणाएं या मिथक बहुत ज्यदा प्रचलित होंगे लेकिन यहाँ पर हम कुछ प्रचलित भ्रांतियों का ही वर्णन एवं तथ्यों अर्थात Yoga Myth and facts
Read More