मलेरिया कारण लक्षण प्रकार एवं उपचार

मलेरिया नामक इस बीमारी से शायद सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ होंगे मलेरिया को शीत ज्वर या मौसमी बुखार भी कहा जाता है | यह Malaria नामक रोग प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु के मनुष्य के रक्त में पहुँचने से होता है, यह जीवाणु मादा एनाफिलिज मच्छर द्वारा  मनुष्य के रक्त तक पहुँचाया जा सकता है | इस बीमारी में सामन्यतया रोगी को सर्दी के साथ बहुत तीव्र बुखार चढ़ता है और कुछ समय बीत जाने पर पसीना आकर यह बुखार उतर जाता है | जहाँ तक इस बुखार के आने का सवाल है यह 48-72 घंटे के अन्तराल में फिर से आता है | मलेरिया होने के कारण (Cause Of malaria in Hindi): जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की Malaria होने का मुख्य कारण प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु होता है जो मादा एनाफिलिज मच्छर द्वारा मनुष्य के रक्त तक पहुंचकर इस बीमारी को पैदा करता है | इस जीवाणु की चार जातियां होती हैं और ये चारों जातियां Malaria को पैदा करने में सहायक हैं | प्लाज्मोडियम वाइवैक्स प्लाज्मोडियम ओवेल प्लाज्मेडियम फेल्सीपेरम प्लाज्मोडियम मलेरी मलेरिया के लक्षण (Symptoms of malaria in Hindi): Malaria रोग से ग्रसित रोगी को कंपकंपी होने के साथ तेज बुखार चढ़ता है |
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टाइफाइड कारण, लक्षण एवं उपचार

Typhoid को हिंदी में भी सामान्य तौर पर टाइफाइड के नाम से ही जाना जाता है लेकिन इसके अलावा इस बीमारी को और भी अनेक नामों जैसे Enteric Fever, मियादी बुखार, मोतीझारा, आन्त्र ज्वर इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है । Typhoid नामक इस रोग की यदि हम बात करें तो इस प्रकार का यह रोग एक संक्रामक एवं लम्बी अवधि का बुखार है जिसका होने का सबसे प्रमुख कारण Salmonella Typhi नामक एक जीवाणु है | इस संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्ति या मरीज को तेज बुखार के साथ बैचैनी, भूख न लगना, पेट दर्द इत्यादि लक्षण हो सकते हैं | टाइफाइड नामक इस रोग के बिगड़ जाने पर ग्रसित व्यक्ति को आँतों से रक्तस्राव इत्यादि जैसे लक्षण हो सकते हैं |     टाइफाइड होने के कारण (Cause of typhoid in Hindi): हालांकि जैसे की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की टाइफाइड नामक इस रोग के होने का मुख्य कारण salmonella typhi नामक जीवाणु होता है लेकिन यह जीवाणु गन्दगी अर्थात साफ़ सफाई न होने पर पनपता है, इसलिए निम्न कारणों को इसके होने के कारण माना जा सकता है | गंदगी होने पर व सफाई में कमी के कारण ही यह बीमारी फैलती
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गुहेरी आँख की फुंसी कारण लक्षण एवं ईलाज

आँख में अर्थात पलक के नीचे होने वाली फुंसी को गुहेरी कहा जाता है | गुहेरी नामक यह रोग पलक के बालों के कोषक में संक्रमण के कारण हो सकता है, पलक के नीचे होने वाली फुंसी अर्थात गुहेरी का होने का जो मुख्य कारण होता है वह पलक के बालों पर होने वाला संक्रमण होता है | गुहेरी यानिकी पलक के नीचे होने वाली इस फुंसी का रंग लाल हो सकता है जो  तीन-चार दिन में पीप पड़ने के बाद स्वयं भी फट सकती है । कहने का आशय यह है की पलक के नीचे होने वाली यह फुंसी पीड़ादायक एवं बदसूरत तो ओ सकती है लेकिन यह बहुत अधिक गंभीर नहीं होती इसलिए कुछ घरेलू नुश्खों जैसे ओइनमेंट या गरम सेक से भी इसमें राहत मिल सकती है | इस पलक के नीचे होने वाली फुंसी के कारण यदि रोगी के आँखों की दृष्टी में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन दिखाई दे और उपर्युक्त बताई गई घरेलु नुश्खों से कोई असर न हो रहा हो तो गुहेरी से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए | गुहेरी अर्थात पलक के नीचे फुंसी होने के कारण: अधिकतर तौर पर यह बड़े लोगों में स्टेफाईलोकोकस नामक जीवाणु
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Vomiting अर्थात उल्टियाँ लगने के कारण एवं उपचार

अक्सर जब बच्चे उल्टी अर्थात Vomiting करने लगते हैं तो माता पिता चिंतित हो जाते हैं की आखिर यह किन कारणों से हुआ होगा | बच्चों में उल्टी होने के अलग अलग कारण अर्थात कुछ सामान्य तो कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं | ये जो उल्टियाँ Vomiting बच्चों को होती हैं यह किस वजह से हो रही हैं अर्थात इसके कारण क्या हैं यह तो एक चिकित्सक ही विभिन्न जांचों के माध्यम से बता पाने में सक्षम होंगे लेकिन लेकिन यहाँ पर हम कुछ सामान्य से कारणों का वर्णन कर रहे हैं जिनकी वजह से बच्चे उल्टियाँ कर सकते हैं |  उल्टी होने के मुख्य कारण (Cause of Vomiting hindi): बच्चे को दूध पिलाने के तरीके में कमी, या एमनियोटिक द्रव्य या कोई अन्य दवाई की प्रतिक्रिया के कारण भी बच्चे को उल्टी हो सकती है । मेकोनियम प्लग, ट्रेकिया व इसोफेगस का फिस्ट्राला, आंतों में रुकावट भी एक कारण हो सकता है । सेप्टीसीमिया, मेनीनजाईटिस, ऐनसेफेलाइटिस इत्यादि भी एक कारण हो सकता है । बच्चे को चोट लगना, हाइड्रोसिफेलस भी Vomiting एक कारण हो सकता है । खून में कैल्शियम की मात्रा का अधिक व कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का कम होना भी एक कारण हो सकता
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सोरायसिस कारण लक्षण उपचार -Psoriasis in hindi

Psoriasis जिसे Hindi में सोरायसिस कहा जाता है यह चमड़ी अर्थात चर्म से सम्बंधित रोग यानिकी चर्म रोग है | यह एक ऐसी बीमारी है जिसमे शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा के ऊपर मोती सी परत जम जाती है अर्थात Psoriasis सोरायसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पूरे शरीर पर या शरीर के कुछ हिस्सों में चमड़ी पर दाद हो जाते हैं जिस पर सफेद पपड़ियां सी जमा होती रहती हैं । इस बीमारी की यदि हम बात करें तो यह सामान्यत: सिर के बालों के नीचे, हाथ की हथेलियों, पाँव के तलवे, कोहनी, घुटनों, पेट, पीठ  इत्यादि जगहों पर होती हैं |   सोरायसिस के कारण (Cause of Psoriasis): यद्यपि सोरायसिस होने के किन्हीं ठोस कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है अक्सर ऐसा देखा गया है की इस प्रकार के लगभग 10% मामले वंशानुगत होते हैं अर्थात वे ऐसे सदस्य होते हैं जिनके परिवार में यह बीमारी पहले से हुई होती है इसके अलावा और भी कुछ कारण हैं जिनका विवरण निम्नवत है | किसी कारणवश Immune System का असंतुलित होना भी इसका कारण हो सकता है | असंतुलित आहार भी एक कारण हो सकता है | तनाव, संक्रमण, चोट, शराब, धुम्रपान इत्यादि
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Mumps गलसुआ कनफेड के कारण लक्षण उपचार.

Mumps in hindi पर बात करने से पहले यह जान लेते हैं की इस बीमारी को गलसुआ, कनफेड भी कहा जाता है यद्यपि इस प्रकार यह रोग शरीर के अनेकों भागों को प्रभावित कर सकता है लेकिन मुख्य रूप से यह रोगी की लार ग्रंथि को प्रभावित करता है | Mumps यानिकी गलसुआ या कनफेड नामक यह रोग एक वायरस से होने वाला तीव्र संक्रामक रोग है जिसमें कान के पीछे पेरोटिड ग्रन्थि (parotid gland) में सूजन आ जाती है । यद्यपि इस सूजन में मवाद नहीं पड़ता है । और इस रोग में दवाइयों से ज्यादा सावधानियों की आवश्यकता होती हैं जिनका वर्णन हम इस लेख के इलाज सेक्शन में करेंगे बाकी यह बीमारी लगभग दो हफ़्तों में अपने आप ठीक हो जाती है | इस रोग की यदि बात करें तो यह अधिकतर बच्चों में अर्थात 5 से 15 साल की उम्र में अधिक पाया जाता है और इसमें भी लड़कों की अपेक्षा लड़कियों को यह अपना शिकार अधिक बनाता है | चूँकि इस रोग अर्थात Mumps, कनफेड या गलसुआ के दौरान प्रभावित व्यक्ति को दर्द हो सकता है ऐसे में चिकित्सक की सलाह पर कुछ दर्द निवारक गोलियां जैसे ibuprofen या paracetamol इत्यादि प्रभावित बच्चे को
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Allergic Rhinitis नाक की एलर्जी.

Allergic Rhinitis से अभिप्राय नाक की एलर्जी से है जैसा की हम सबको विदित है नाक मनुष्य शरीर का एक ऐसा अंग है जो सांस के माध्यम से शरीर के अन्दर प्रविष्ट करने वाले धूल कणों को रोकने का काम करती है | लेकिन कभी कभी ऐसा होता है की सांस के माध्यम से ये कण शरीर के अन्दर प्रविष्ट कर जाते हैं तो शरीर में उपलब्ध रोग प्रतिरोधक प्रणाली इनके प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करती है जिससे नाक की एलर्जी हो जाती है | हालांकि यह सत्य है की इस प्रकार की यह बीमारी जानलेवा नहीं होती है लेकिन नाक की एलर्जी यानिकी Allergic Rhinitis से ग्रसित व्यक्ति के नियमित कार्य बाधित अवश्य होते हैं | कभी-कभी क्या होता है की एलर्जी से शरीर में विशेष तरह के प्रतिरोधक बनते हैं जिससे ये नाक व श्वास नली की श्लेष्मा झिल्ली में फिक्स हो जाते हैं और इससे हिस्टामिन जैसे पदार्थ निकालते हैं, जिससे मरीज को बार-बार छींके आती रहती हैं । नाक की एलर्जी के कारण (Cause of Allergic Rhinitis): नाक की एलर्जी के कुछ मुख्य कारण निम्नवत हैं | ऐसे परिवार से जुड़े सदस्य जिनके परिवार के किसी सदस्य को Allergic Rhinitis पहले भी हुआ हो अर्थात नाक
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