पेशाब की रुकावट-Retention of Urine कारण, लक्षण उपचार .

पेशाब की रुकावट से आशय मूत्र मार्ग में किसी कारणवश आई रुकावट से है जिसमे प्रभावित व्यक्ति को मूत्र विसर्जन में तकलीफ का अनुभव होता है अर्थात मूत्र विसर्जन की इच्छा होने के बावजूद व्यक्ति को पेशाब आती ही नहीं, या फिर बहुत कम मात्रा में आती है | यह समस्या किसी को भी स्त्री, पुरुष बच्चों किसी को भी कभी भी हो सकती है | यद्यपि इस पेशाब की रुकावट के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे गुर्दे में पथरी, प्रोस्टेट ग्रन्थि का बढ़ जाना इत्यादि या फिर किसी दुर्घटना में चोट लगने के कारण या भारी सामान उठाने की वजह से नस दबने के कारण भी ऐसा हो सकता है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से पेशाब की रुकावट के कारणों, लक्षणों एवं ईलाज पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे | पेशाब की रुकावट के कारण (Cause of Retention of Urine): हालांकि पेशाब की रुकावट के उम्र के आधार पर अलग अलग कारण हो सकते हैं | बच्चों में पेशाब की रुकावट पथरी, Phimosts, मूत्र नलिका में मांस का बढ़ना यानिकी Stricture in uretha, इत्यादि के कारण हो सकती है | व्वयस्क व्यक्तियों में भी मुत्र्नालिका की पथरी, मूत्र नलिका में मांस का
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खसरा के लक्षण कारण उपचार (Measles in Hindi)

खसरा बीमारी अर्थात Measles की यदि हम बात करें तो यह एक संक्रामक बीमारी है इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण रुबैला नामक एक वायरस होता है | खसरा नामक यह बीमारी सर्दियों व वर्षा ऋतु में अधिकतर स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है | ‘Rubeola Virus’ द्वारा उत्पन्न खसरा नामक यह रोग एक संक्रामक रोग है । इसमें रोगी को छींके आने के साथ-साथ आँख-नाक से पानी बहने के साथ साथ तेज बुखार भी आता है | मुहँ की श्लेष्मिक झिल्ली पर ‘कोपलिक धब्बे’ पड़ जाते हैं । रोगी के माथे से शुरू होकर सम्पूर्ण शरीर पर लाल-लाल रंग के  दाने से निकल आते  हैं । खसरे का टीका बच्चे को 9 महीने की उम्र में लगता है इस बीमारी से अपने बच्चों को बचाने के लिए यह टीका जरुर लगाना चाहिए | इस संक्रमण का समयकाल 10-14 दिनों का हो सकता है | और इस रोग की खासियत भी यही है की यह जीवन में केवल एक बार ही होता है | सात महीने से कम उम्र के बच्चों को यह रोग होने का खतरा नहीं रहता है | खसरा के कारण (Cause of Measles in Hindi) जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता
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टिटनेस के कारण, लक्षण , प्रकार एवं ईलाज की जानकारी |

टिटनेस नामक इस बीमारी का नाम शायद सभी ने कभी न कभी अवश्य सुना होगा जी हाँ जब भी मनुष्य को किसी धातु जैसे लोहे इत्यादि से चोट लगती है तो तुरंत टिटनेस (Tetanus) के इंजेक्शन लगाने को कहा जाता है | ताकि भविष्य में आने वाले इन्फेक्शन एवं सुजन इत्यादि से बचा जा सके टिटनेस नामक इस रोग को अन्य नामों जैसे धनुस्तम्भ, लाक जाँ, हनस्तम्भ,धनुर्वात इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है । इस रोग की यदि हम पैदा होने की बात करें तो यह मुखतः ‘क्लास्ट्रीडियम टिटेनाई’ (clostridium tetani bacteria ) द्वारा होता है | इस बैक्टीरिया का जन्म मनुष्य के शरीर में किसी जख्म द्वारा हो सकता है अर्थात इस तरह का बैक्टीरिया मनुष्य के शरीर में जख्म द्वारा प्रविष्ट हो सकता है | यह बैक्टीरिया घाव में विष पैदा करने में सहायक होता है जिससे अधिकतर तौर पर टिटनेस नामक यह रोग तीव्र संक्रामक एवं प्राणघातक ही होता है । टिटनेस के रोग में जबड़ों का आपस में भिंच जाना, शरीर के सभी मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर का धनुष की तरह पीछे की ओर मुड़ जाना, दौरे पड़ना व श्वासनीय ऐंठन हो जाता है । इस रोग की अवधि 2-14 दिनों तक की
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रेबीज कारण, लक्षण एवं उपचार |

रेबीज नामक इस बीमारी को हाइड्रोफोबिया एवं जलांतक भी कहा जाता है | यह रोग किसी पागल कुत्ते या अन्य किसी जानवर के काटने से उत्पन्न होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो एक वायरस द्वारा एक दुसरे को फैलता है | रेबीज नामक इस बीमारी का रोगी के तंत्रिका तंत्र पर बेहद असर होता है | जहाँ तक इस बीमारी के के वायरस का सवाल है इस बीमारी का वायरस जानवरों के लार में रहता है भारतवर्ष की यदि हम बात करें तो लगभग 90% रेबीज का वायरस कुत्तों के काटने के कारण फैलता है | रेबीज बीमारी के कारण: रेबीज की बीमारी से पीड़ित कोई भी जानवर जैसे कुत्ता, बंदर या अन्य जंगली जानवर के काटने पर उसकी लार द्वारा इसका वायरस मनुष्य के शरीर में पहुंच जाता है, और तंत्रिका तंत्र में इस वायरस की संख्या लगातार बढ़ती जाती है । रेबीज बीमारी के लक्षण (Symptoms of Rabies in Hindi): जानवरों में इस रोग के लक्षणों की बात करें तो यह रोग जानवरों में लगभग दस दिनों तक रहता है और दस दिनों के बाद जानवर की मृत्यु हो सकती है | इस रोग के लगने के दौरान किसी भी जानवर के व्यवहार में अचानक से
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काली खांसी (Whooping-Cough) के कारण लक्षण उपचार |

काली खांसी को अन्य नामों जैसे Whooping-Cough, परट्यूसिस एवं कुकुर खांसी के नाम से भी जाना जाता है । इस प्रकार की यह खांसी का प्रकार गंभीर खांसी के प्रकारों में सम्मिलित है इस प्रकार की खांसी से सामान्यत: श्वसन तंत्र यानिकी Respiratory System प्रभावित होता है | इस खांसी की यदि बात करें तो यह अधिकतर रूप से बच्चों को अपना निशाना बनाती है | अर्थात काली खांसी या Whooping-Cough बच्चों में पाया जाने वाला एक खतरनाक संक्रामक रोग है | इस रोग में प्रभावित बच्चे को बार बार खांसी के दौरे उठते हैं और लम्बी आवाज के साथ सांस आती है | काली खांसी के कारण (Cause and reason of whooping Cough): काली खांसी के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार से हैं | काली खांसी का मुख्य कारण Bordetella pertussis नामक जीवाणु होता है इसी जीवाणु के कारण यह रोग फैलता है । यह संक्रामक रोग अधिकतर पांच वर्ष से पन्द्रह वर्ष की उम्र तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता है । काली खांसी नामक यह रोग अधिकतर सर्दियों में होता है । यह रोग रोगाणु बलगम, थूक, रोगी द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान को दुसरे द्वारा प्रयोग में लाने से फैलता है । यह रोग
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चिकन पॉक्स के कारण लक्षण एवं ईलाज

चिकन पॉक्स को कई अन्य नामों जैसे छोटी चेचक, छोटी माता, बेरीसेला इत्यादि नामों से भी जाना जाता है | चिकन पॉक्स नामक यह रोग एक बेहद ही तीव्र संक्रामक रोग है, और अधिकतर तौर पर इस तरह का यह रोग बच्चों को अपना शिकार बनाता है | इस बीमारी के शुरूआती दौर में सिर में सिरदर्द एवं बुखार होता है | और उसके बाद शरीर पर पानी वाले छोटे छोटे दाने निकल आते हैं | चिकन पॉक्स होने के कारण: चिकन पॉक्स के होने का मुख्य कारण एक वायरस जिसे herpes varicella zoster कहा जाता है होता है | जहाँ तक इस वायरस के फैलने की बात है यह हवा, थूक, छींक या रोगी के कपड़े, विस्तर पर लगे फोड़े फुंसियों के तरल के संपर्क में आने से भी हो सकता है | कहने का आशय यह है की चिकन पॉक्स नामक यह बीमारी एक संक्रामक रोग है जो रोगी के छींकने, खांसने या उपर्युक्त अन्य कारणों से फैलती है | कहने का आशय यह है की इस रोग को पैदा करने वाले वायरस का संक्रमण रोगी के मुंह से  निकले छोटे-छोटे बिन्दु कणों से फैलता है । जो बड़ों के अपेक्षा बच्चों को अपना शिकार अधिक बनाता
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सर्दी जुकाम,राईनाईटिस के कारण, लक्षण एवं ईलाज

सर्दी जुकाम,राईनाईटिस कोराइजा, कोल्ड की बात करें तो यह नाक व ऊपरी-श्वास तंत्र का एक वायरल संक्रमण है, जिसमें नाक से पानी निकलता रहता है । रोगी को छींकें आने के साथ सिरदर्द व हल्का बुखार भी रहता है और आंखों से पानी निकलता है । यह सर्दी जुकाम राईनाईटिस इत्यादि की समस्या संक्रमण पर आधारित है और यह कभी भी हो सकती है लेकिन मौसम में बदलाव होने या ठण्ड लगने की वजह से यह अधिक हो सकता है | इसके अलावा अन्य कारण भी हैं जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है | सर्दी जुकाम,राईनाईटिस होने के कारण: सर्दी जुकाम राइनाईटिस के होने के कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं | राइनो वायरस, इन्फ्लूएंजा वायरस, एडीनो वायरस, इकोवायरस का हवा द्वारा संक्रमण भी एक कारण हो सकता है । नाक की सेप्टम हड्डी टेढ़ी होने से भी बार-बार जुकाम लगने की संभावना रहती है | तेज विषाक्त धुंए या धूल इत्यादि का नाक में घुसकर प्रदाह उत्पन्न करना भी एक कारण हो सकता है । सर्दी के मौसम में बाहर अधिक घूमने से भी सर्दी जुकाम राइनाईटिस होने की संभावना रहती है । सर्दी जुकाम,राईनाईटिस के लक्षण (Symptoms): सर्दी जुकाम,राईनाईटिस की शुरुआत में नाक में खुजलाहट सी हो सकती है, उसके
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