Category: मेडिकल जांच

Audiometry Test

Audiometry test से हमारा आशय सुनने की जांच से है जिसे ऑडियोग्राम भी कहा जाता है | इसमें रोगी की ध्वनि सुनने की क्षमता की जांच की जाती है इस परीक्षण में रोगी को सुनाई जाने वाली ध्वनियां उनकी तीव्रता, तरंग, कम्पन इत्यादि के आधार पर अलग अलग होती हैं | यदि हम धवनी सुनने की क्षमता की प्रक्रिया के बारे में संक्षिप्त रूप से जानने की कोशिश करेंगे तो हम पाएंगे की किसी भी जीव को तब सुनाई देता है जब ध्वनी की तरंगे भीतरी कान की नसों को उत्तेजित करने का काम करती हैं उसके बाद इन्ही उत्तेजित नसों के माध्यम से ध्वनि फिर तंत्रिका पथ के साथ मष्तिष्क तक की यात्रा करती हैं | यहाँ तक की ध्वनि तरंगे कान के अन्दर कान के रस्ते से कान के छेद एवं मध्य कान की हड्डियों के माध्यम से कान तक की यात्रा भी करती हैं और ये ध्वनि तरंगे कान के चारों ओर पीछे हड्डियों से भी गुज़र सकती हैं | जहाँ तक ध्वनि की मापने की बात है इसे डेसीबल (डीबी) में मापा जा सकता है | यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है की लगभग 85 DB से अधिक की ध्वनि कुछ घंटे तक
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Electrocardiogram (ECG)

Electrocardiogram (ECG) को EKG भी कहा जाता है यह परीक्षण त्वचा के विद्युत् चालकों से एक निश्चित समय के लिए ह्रदय की विद्युत क्रियाकलाप को बाहर से रिकॉर्ड किये जाने की प्रक्रिया है | Electrocardiogram नामक इस शब्द की उत्पति ग्रीक भाषा के शब्द Electro एवं Cardio को मिलकर हुई है | जहाँ इलेक्ट्रो का अर्थ विद्युत एवं कार्डियो का अर्थ ह्रदय से लगाया जा सकता है | ह्रदय की प्रत्येक धड़कन के साथ विद्युत् की गति ह्रदय से होकर गुजरती है इसी विद्युत् की उत्तेजना से ह्रदय की मांसपेशियां संकुचित होकर ह्रदय को रक्त प्रवाहित करती हैं | Electrocardiogram नामक यह टेस्ट ह्रदय के असमान्य तलों की माप एवं निदान करने का सर्वोत्तम तरीका है जिसे एक विद्युत्हृतलेखी उपकरण द्वारा अंजाम तक पहुँचाया जाता है | ECG Medical Test क्यों किया जाता है: चिकित्सक निम्न कारणों से ECG करने की सलाह दे सकते हैं | यदि किसी व्यक्ति के बायीं ओर सीने में दर्द हो रहा हो | यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर उच्च या कम हो जा रहा हो | यदि किसी व्यक्ति को घबराहट जैसी शिकायत हो रही हो | डॉक्टर को दिल की धड़कन सुनते वक्त कोई असमान्य ध्वनि सुनाई दे रही हो |
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Myelogram Medical Test

Myelogram नामक यह मेडिकल टेस्ट एक एक्स रे परीक्षण है जिसका उपयोग मनुष्य की रीढ़ की हड्डी की विभिन्न बीमारियों जैसे डिस्क हर्नियेशन, स्पाइनल स्टेनोसिस, tumor या फ्रैक्चर इत्यादि का पता लगाने के लिए किया जाता है | इसके अलावा जब किसी कारण वश रीढ़ की हड्डी की कुछ तंत्रिकाएं अंजान समस्याओं से प्रभावित होती हैं तो उन अंजान समस्याओं का पता करने के लिए भी Myelogram नामक इस मेडिकल टेस्ट को उपयोग में लाया जाता है | इस पूरी प्रक्रिया में Radiographic Contrast Media नामक डाई का उपयोग किया जाता है इस डाई को रीढ़ की हड्डी में मौजूद तरल पदार्थ cerebrospinal fluid (CSF) में इंजेक्ट किया जाता है | डाई इंजेक्ट होने के बाद यह Contrast डाई चित्र लेते समय Spinal Canal cord एवं तंत्रिका मूलों को प्रकाशित करती है | इस तरह से जब CT स्कैन और  Myelography के संयुक्त रूप का उपयोग करके जो चित्र उभरते हैं उनमे रीढ़ की हड्डी की बनावट और उसकी कोशिकाओं के बारे में साफ़ एवं स्पष्ट रूप से जानकारी मिलती है | और इन्ही चित्रों की मदद से चिकित्सक रीढ़ की हड्डी की विभिन्न समस्याओं के बारे में पता लगाने में सक्षम होते हैं | Preparation for Myelogram: मायलोग्राम
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Laryngoscopy Medical Test

Laryngoscopy गले के अन्दर का एक परीक्षण है जिसमे व्यक्ति के voice बॉक्स यानिकी स्वरयंत्र की जांच की जाती है | व्यक्ति के voice बॉक्स में मुखर तार होते हैं जो व्यक्ति को बोलने में सहायक सिद्ध होते हैं | Laryngoscopy Test के लिए तैयारी : इस परीक्षण के लिए तैयारी लैरींगोस्कोपी के प्रकार पर निर्भर करेगी । अगर यह जांच अर्थात मेडिकल टेस्ट सामान्य एनेस्थेसिया के तहत की जाएगी, तो आपको टेस्ट से पहले कुछ घंटों तक खाने या पीने से मना किया जा सकता है | लैरींगोस्कोपी टेस्ट करने के कारण: Laryngoscopy नामक यह मेडिकल टेस्ट चिकित्सक को voice बॉक्स एवं गले सम्बन्धी अनेक रोगों को जानने में एवं उनका इलाज करने में मदद करेगा | लेकिन फिर भी चिकित्सक इन निम्नलिखित कारणों में से किसी एक कारण के चलते लैरींगोस्कोपी टेस्ट के लिए कह सकते हैं | काफी समय से गला ख़राब जो इलाज के बावजूद ठीक न हो रहा हो | पुरानी खांसी या खांसी में रक्त आना | निगलने में परेशानी होना | कान दर्द जो ठीक ही नहीं हो रहा हो | गले में कुछ फंसा हुआ है ऐसा लगने पर | सांस की समस्या | गले में दर्द जो ठीक नहीं हो
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Bronchoscopy Medical Test

ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) नामक यह जांच व्यक्ति की श्वास नलियों एवं फेफड़ों की जांच करने का एक टेस्ट हैं | इस मेडिकल टेस्ट को अंजाम देने के लिए एक छोटी सी tube समबन्धित व्यक्ति के नाक या मुहं के रस्ते से फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है | यह मेडिकल टेस्ट फेफड़ों की जांच करने या श्लेष्म को हटाने के लिए किया जाता है | जब इस परीक्षण के दौरान Tissues के सैंपल लेकर उसका प्रयोगशाला में अध्यन किया जाता है तो इस क्रिया को biopsy कहा जाता है | जिस किसी भी व्यक्ति को चिकित्सक द्वारा Bronchoscopy  नामक जांच के लिए सुझावित किया गया है उस व्यक्ति को परीक्षण परिसर में आते समय अपने परिवार के किसी सदस्य को अपने साथ लाने की आवश्यकता होगी | क्योंकि जांच के बाद वाहन चलाना इत्यादि प्रभावित व्यक्ति के लिए जोखिम भरा हो सकता है | जहाँ तक जांच में समय लगने की बात है इसमें लगभग दो घंटों तक का समय लग सकता है लेकिन प्रभावित व्यक्ति को कुछ अतिरिक्त समय का कार्यक्रम बनाकर जांच परिसर में पहुंचना पड़ेगा | Preparation for Bronchoscopy in Hindi : Bronchoscopy नामक इस मेडिकल टेस्ट की तैयारी व्यक्ति को टेस्ट के एक दिन पहले से करनी
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Ultrasound test-अल्ट्रासाउंड जांच.

Ultrasound का नाम शायद सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी अवश्य सुना होगा वह इसलिए क्योंकि शरीर में विभिन्न रोगों की स्थिति जानने के लिए चिकित्सकों द्वारा Ultrasound Test करने को कहा जाता है | अल्ट्रासाउंड नामक यह जांच एक स्कैनिंग जांच है जिसे सोनोग्राफी भी कहा जाता है | अल्ट्रासाउंड नामक इस तकनीक का प्रयोग शरीर में शरीर के अंगों एवं Tissues इत्यादि को देखने एवं उनकी स्थिति जानने के लिए किया जाता है | इस तकनीक के अंतर्गत शरीर के अन्दर निर्मित अंगों एवं उतकों की तस्वीर देखने के लिए इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगो का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन ये तरंगे इन्सान को सुनाई नहीं देती | Ultrasound process के दौरान जब उच्च आवृत्ति वाली ध्वनी तरंगे शरीर में प्रविष्ट करायी जाती हैं तो कुछ तरंगों को शरीर में उपलब्ध उतकों (Tissues) द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है और कुछ तरंगे टकराकर वापस आती हैं इसी दौरान इन वापस आने वाली तरंगो को अल्ट्रासाउंड मशीन द्वारा माप लिया जाता है और उस क्षेत्र विशेष को छवि के रूप में रूपांतरित कर लिया जाता है | Types of Ultrasound in Hindi: सामान्य तौर पर यदि हम देखेंगे तो हम पाएंगे की सभी प्रकार
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Angiography Test

Angiography नामक इस टेस्ट को Angiogram भी कहा जाता है इस परीक्षण में चिकित्सक द्वारा सम्बंधित व्यक्ति या महिला की रुधिर नलिकाओं में एक अपारदर्शक पदार्थ प्रविष्ट कराया जाता है जिससे रुधिर नलिकाओं की एक्स रे के दौरान फोटो एकदम स्पष्ट एवं साफ़ आ सके | Angiography test को अंजाम देने के लिए चिकित्सक द्वारा टांग के उपरी सिरे या हाथ की नस में एक Tube जिसे Catheter कहा जाता है घुसाई जाती है उसके बाद इस Catheter को शरीर के उस हिस्से तक पहुँचाया जाता है जिस हिस्से की जांच होनी होती है | और इसी Catheter के माध्यम से चिकित्सक द्वारा व्यक्ति के शरीर में डाई प्रविष्ट करायी जाती है | इसके बाद जब डाई रक्त नलिकाओं से होकर आगे की और बहती है तो इस समय एक्स रे ले लिया जाता है | Angiography नामक यह टेस्ट शरीर में या शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त के बहाव की जांच करता है की उस विशेष हिस्से में रक्त की सप्लाई ढंग से हो रही है की नहीं | जब यही प्रक्रिया ह्रदय की रक्त धमनियों की जांच के लिए की जाती है तो इस प्रक्रिया को Coronary Angiography कहा जाता है |  Coronary Angiography के
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