Tonsils के लक्षण, कारण एवं ईलाज की जानकारी |

Tonsils को समझने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की इस ब्रहमांड में जितने भी जीवधारी हैं बनाने वाले ने सबको बड़ी सोच समझकर बनाया है ठीक इसी प्रकार हमारे शरीर में कुदरत का बनाया एक अदभुत विभाग है जिसे रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System कहते हैं । इस प्रणाली का मुख्य काम शरीर में बाहर से आने वाली किसी नई चीज जैसे किटाणु, रोगाणु, इत्यादि के खिलाफ शरीर में फौज (AntiBodies) का निर्माण करना होता है  ताकि भविष्य में जब भी वह किटाणु या रोगाणु शरीर में आएं तो Anti Bodies उन्हें नष्ट करने में सक्षम हो सके । Immune System यानिकी बीमारी प्रतिरोधक प्रणाली का ही एक अंग होता है जिसे Tonsils कहते हैं यह हर व्यक्ति के गले के अंदर दोनों तरफ होते हैं | इसके अलावा एडिनायड जो तालु के ऊपर अर्थात नाक के पीछे स्थित होते हैं । शरीर में इनका काम प्राय: भोजन व सांस के द्वारा शरीर में घुसने वाली किसी भी नई चीज के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक विभाग यानिकी Immune System को सचेत कर उचित Antibodies बनाने में सहायता प्राप्त करना होता है । बहुत बार या कई बार ऐसा हो सकता है की किटाणु व रोगाणुओं के संपर्क में आने से Tonsils कभी-कभी स्वयं भी संक्रमित हो सकते हैं इस बीमारी अर्थात रोग को acute tonsillitis कहा जाता है |

Tonsils cause symptoms treatment

टॉन्सिल्स के लक्षण (Symptoms of tonsils in Hindi):

टॉन्सिल्स अर्थात गले बढ़ने के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • Acute tonsillitis होने पर गले में दर्द हो सकता है |
  • Tonsils होने पर थूक सटकने या खाना निगलने में दर्द महसूस हो सकता है |
  • शरीर में तकलीफ, बुखार इत्यादि भी हो सकता है |
  • पेट दर्द, दस्त, गले के बाहर सूजन इत्यादि भी हो सकती है ।
  • बच्चों में कभी-कभी टासिल्ज के साथ एडिनायड भी बढ़ जाते हैं। जिससे बच्चे का मुंह खुला रहता है, नाक बंद रहने से चेहरे की बनावट भी खराब होने लगती है ।
  • बच्चों में दांत बाहर की तरफ उग सकते हैं |
  • सोते समय बच्चा मुंह से लार टपका सकता है |
  • बच्चे में चिड़चिड़ापन, कमजोरी, वजन न बढ़ना, खाने में अरूचि इत्यादि लक्षण Tonsils के हो सकते हैं |
  • सुनने में कमी, बार-बार छाती का इंफेक्शन, कान में पस आना, बार-बार गले या पेट में दर्द होना, बच्चों में टासिल्ज व एडिनायड के कारण हो सकता है ।

टॉन्सिल्स होने के संभावित कारण (Cause of Tonsils in Hindi)

Tonsils होने के कुछ संभावित कारण निम्नवत हैं |

  • टॉन्सिल्स होने का वायरस एक कारण हो सकता है |
  • यह वायरस शीत अर्थात ठण्ड की वजह से हो सकता है |
  • या फिर एक जीवाणु इन्फेक्शन हो सकता है |
  • अधिकतर टॉन्सिल्स इन्फेक्शन या जीवाणु के कारण गले में संक्रमण होने से होता है |
  • ठंडी एवं खट्टी चीजों का अधिक सेवन से भी Tonsils हो सकता है |

टॉन्सिल्स का ईलाज (Treatment of tonsillitis in Hindi) :

टॉन्सिल्स के स्टेज अर्थात स्थिति के आधार पर इसका ईलाज एवं Treatment अलग अलग हो सकते हैं | इसलिए बिल्कुल शुरू में जब इस रोग की वायरल स्टेज हो तो नमक के हल्के गर्म पानी के गरारे किये जा सकते हैं |

  • यदि रोगी को बुखार हो तो इस अवस्था में रोगी को क्रोसिन या डिस्प्रीन की गोली दी जा सकती है और मरीज को आराम करने के लिए कहा जा सकता है ।
  • उपर्युक्त प्रक्रियाएं करने के बाद यदि दो-तीन दिन तक तकलीफ कम न हो तो चिकित्सक की सलाह पर एंटीबायोटिक्स जैसे Cap, Novamox , Cepoprox इत्यादि दी जा सकती हैं |
  • इसके अलावा यदि टांसिल्ज पर सफेद दाने या सफ़ेद परत दिखे तो तुरंत ई.एन.टी. विशेषज्ञ से मिलना चाहिए क्योंकि यह गलघोटू (Diptheria) के लक्षण हो सकते हैं जिनका पता चिकित्सक द्वारा उपयुक्त जांच का विश्लेषण करके लगाया जा सकता है ।
  • Tonsils से ग्रसित यदि किसी मरीज में बार-बार गले का संक्रमण होने लगे तो इसे chronic tonsillitis कहा जाता है । इस बीमारी में किटाणु टांसिल्ज से पूरी तरह नष्ट नहीं होते हैं व दवा देने से लक्षण दब जाते हैं मगर मौसम बदलने, ठंडी, खट्टी चीजें खाने में दोबारा Acute Infection हो सकता है ।
  • chronic tonsillitis में भी चिकित्सक द्वारा मरीज को एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं मरीज को चाहिए की वह चिकत्सक द्वारा बताये गए निर्देशों के आधार पर इनका सेवन करे और ठंडी, खट्टी, तली चीजें, गर्म/सर्द, धूल/मिट्टी, धम्रपान, मदिरा सेवन इत्यादि से परहेज करे ।

Tonsils से ग्रसित व्यक्ति को इसका उपयुक्त ईलाज करने के लिए चाहिए  की वह किसी अच्छे कान, नाक, गला विशेषज्ञ से मिलकर अपने रोग के बारे में सलाह ले । यदि विशेषज्ञ द्वारा आपरेशन की राय दी जाती है तो रोगी को चाहिए की वह आपरेशन करवा ले । यदि जरूरत पड़ने पर भी आपरेशन न करवाया तो रयूमेटिक फिवर, दिल पर या गुर्दे पर असर, सुनने में कमी, चेहरे की बनावट में अंतर, नाक का छोटा रहना, बार-बार छाती का इंफेक्शन होना जीवन भर के लिए तंग कर सकते हैं ।

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रोगी की आयु के बाद Tonsils का शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कोई योगदान नहीं होता है। अत: यह सोचना गलत है कि टासिल्ज निकलवाने से बच्चे को नुकसान होता है बल्कि अधिक देर से करवाने पर बच्चे को आपरेशन का पूरा लाभ मिलने में विलम्ब या फिर लाभ नहीं भी मिल सकता है ।

 

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