विटामिन E के फायदे, स्रोत एवं कमी के लक्षण .

विटामिन E की यदि हम बात करें तो यह विटामिन भी विटामिन ए  और विटामिन ‘डी’ की भाँति वसा में घुलनशील होता है । जैसे की हर विटामिन की शरीर को स्वस्थ्य रखने में अग्रणी भूमिका होती है ठीक उसी प्रकार विटामिन ई की भी जीवधारी के शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखने में अहम भूमिका है | चूँकि यह विटामिन विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री में पाया जाता है इसलिए इसकी कमी अर्थात Deficiency को स्वस्थ आहार के माध्यम से ही पूर्ण अर्थात दूर किया जा सकता है | आज हम अपने इस लेख के माध्यम से Vitamin E के Sources अर्थात स्रोतों से लेकर विटामिन ई की कमी के लक्षणों तक के बारे में वार्तालाप करेंगे | तो आइये सर्वप्रथम यह जानने की कोशिश करते हैं की Vitamin E किन किन खाद्य पदार्थो में अधिक पाया जाता है |

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विटामिन E के स्रोत (Sources of Vitamin E in Hindi):

विटामिन E के स्रोत की यदि हम बात करें तो यह विटामिन निम्न पदार्थों में अधिक पाया जाता है |

  • गेहूँ के अंकुरों और उनके तेलों में Vitamin E की मात्रा अधिक पायी जाती है |
  • बिनौले के तेल में इसकी अधिकता देखी जा सकती है |
  • ताड़ के तेल में भी Vitamin E प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |
  • हरी शाक-भाजियों विशेषकर सलाद में इसकी प्रचुरता होती है |
  • पशुओं से उत्पादित भोजन जैसे अण्डे की जर्दी, दूध और मक्खन में भी यह विटामिन थोड़े बहुत अंश में पाया जाता है ।
  • थोड़े बहुत मात्रा में यह विटामिन मांस में भी पाया जाता है |
  • यदि अनाजों की हम बात करें तो हम पाएंगे की अनाजों में मक्के में यह विटामिन सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है |

विटामिन E के फायदे (Benefits of Vitamin E in Hindi):

विटामिन E के कुछ मुख्य फायदे अर्थात Benefits इस प्रकार से हैं |

  • यह शरीर में कोलेस्ट्रोल को संतुलित रखने का काम करता है |
  • यह शरीर में फ्री रेडिकल के तौर पर काम करता है जिससे बीमारियाँ कम विकसित होती हैं |
    यह ख़राब हुई त्वचा को ठीक अर्थात रिपेयर करने में मददगार होता है इसलिए कहा जा सकता है की यह विटामिन त्वचा कैंसर होने के खतरों को कम कर देता है |
  • विटामिन E जीवधारियों के एंडोक्राइन और तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, इसलिए स्वाभाविक रूप से यह हार्मोनों को संतुलित करने में अपनी अहम् भूमिका निभाता है |
  • विटामिन ई उम्र से संबंधित macular degeneration को कम करने में मदद करता है जो अंधापन का एक सामान्य कारण है, हालांकि इसमें ध्यान देने वाली बात यह है की Vitamin E दृष्टिगत रोगों में प्रभावी हो इसके लिए उचित मात्रा में विटामिन सी का सेवन भी जरुरी होता है |
  • यह विटामिन शारीरिक सहनशक्ति और मांसपेशियों की शक्ति में सुधार करने में भी उपयोगी है |
  • युवा लड़के लड़कियों के चेहरे पर अक्सर कील, मुहांसे और फुंसियाँ निकल आती हैं ऐसे में Vitamin E लाभप्रद होता है |

शरीर में विटामिन E की कमी के लक्षण(Symptoms of Vitamin E deficiency in Hindi):

  • विटामिन ई की कमी के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |
  • विटामिन ई की कमी से मनुष्य की मांसपेशियाँ एकदम कमजोर हो जाती हैं |
  • ये मांसपेशियाँ इतनी दुर्बल हो जाती हैं की ये सिकुड़ने लगती हैं |
  • प्रभावित व्यक्ति को इन मांसपेशियों में ऐंठन एवं दर्द की शिकायत होने लगती है |

प्रत्येक दिन विटामिन E की आवश्यकता (Daily Requirement of Vitamin E in Hindi):

चूंकि यह विटामिन स्थिर है, इसलिए ताप, अम्ल, क्षार आदि का इस पर प्रभाव नहीं पड़ता है | इसलिए किस व्यक्ति को कितनी मात्रा में Vitamin E की आवश्यकता होगी यह व्यक्ति की आयु, लक्षणों के आधार पर तय किया जा सकता है | लेकिन एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को  14 से 19 मिलीग्राम विटामिन ई  की आवश्यकता प्रतिदिन हो सकती है । जैसे गर्भवती महिलाओं में अर्थात भ्रूण की रचना के बाद समस्त क्रियाओं के लिए शरीर में Vitamin E की उपस्थिति आवश्यक समझी जाती है । इसलिए ऐसा हो सकता है की एक गर्भवती महिला को सामान्य महिला के मुकाबले प्रतिदिन अधिक विटामिन E की आवश्यकता पड़े |

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 लेकिन उपर्युक्त लक्षण जो हमने इसकी कमी के दिखाए हैं जिसमे व्यक्ति की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं उस प्रयोजन हेतु लगभग 400 मिलीग्राम विटामिन E  रोगी को प्रतिदिन खिलाने पर लाभ हो सकता है |

 

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